नोएडा में पहले के नियमों के मुताबिक सेंट्रली एयरकंडीशन व एस्केलेटर युक्त शॉपिंग मॉल में वाणिज्यिक, व्यावसायिक इकाई, दुकान, प्रतिष्ठान और कार्यालय का न्यूनतम बाजार मूल्य निर्धारित मूल्य से 25 प्रतिशत अधिक आंका जाता था। यानी अगर किसी दुकान की कीमत एक करोड़ होती थी तो उसका न्यूनतम बाजार मूल्य 1.25 करोड़ आंका जाता था। इसी मूल्य पर रजिस्ट्री होती थी। लेकिन इस वर्ष 25 प्रतिशत अधिक राशि जोड़ने के नियम को खत्म कर दिया गया। यानी अब जितने की दुकान होगी। उतने रुपये पर ही 5 प्रतिशत की स्टांप ड्यूटी देय होगी। रजिस्ट्री सस्ती होने से दुकान खरीदना भी सस्ता होगा।
नोएडा में पिछले दिनों वाणिज्यिक प्लॉट की स्कीम निकाली गई थी। इसमें कुल 61 प्लॉट के लिए आवेदन निकाले गए थे। लेकिन केवल एक प्लॉट बिक पाया। इसकी मुख्य वजह मार्केट रेट, प्राधिकरण का रेट और सर्किल रेट में भारी अंतर का होना बताया गया। उदाहरण के लिए किसी एक सेक्टर में अगर जमीन का रेट प्राधिकरण के रेट के मुताबिक एक लाख रुपये प्रति वर्गमीटर आंकी गई थी तो वहां मार्केट रेट 70 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर पाया गया। वहीं सर्किल रेट करीब 2 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर पहले से निर्धारित है। यानी अगर किसी को 100 वर्गमीटर का वाणिज्यिक प्लॉट लेना हो तो प्राधिकरण उसे एक करोड़ में ऑफर करेगा। वहीं मार्केट में किसी अन्य से उसे वही प्लॉट 70 लाख में मिल रहा है। वहीं जब उक्त व्यक्ति रजिस्ट्री कराने जाएगा तो उसे दो करोड़ रुपये का पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देना होगा। इस तरह के भारी अंतर कई वाणिज्यिक सेक्टरों में पाया गया। इस के बाद संपत्ति पुनरीक्षण मूल्यांकन समिति ने इसमें 21.5 प्रतिशत सर्किल रेट में कमी का प्रस्ताव दिया। समिति का कहना है कि सर्किल रेट इतना कम करने के बाद यह प्राधिकरण के दर के बराबर हो जाएगा।
फ्लोर वाइज वाणिज्यिक संपत्तियों में दुकान, कार्यालय, गोदाम आदि की खरीद के दौरान स्टांप ड्यूटी के निर्धारण में 21 प्रतिशत कम सर्किल रेट आंका जाएगा। यानी जिन सेक्टरों में ऐसी संपत्तियां हैं। उनमें वाणिज्यिक संपत्तियों के सर्किल रेट में 21 प्रतिशत कमी का प्रस्ताव दिया गया है। यानी रजिस्ट्री के दौरान कम पैसे देने होंगे।
नोएडा के गांवों में फ्री होल्ड वाणिज्यिक भूमि (एकल संपत्ति) एवं एकल से भिन्न (फ्लोर वाइज) संपत्तियों में औसतन 21 प्रतिशत की दर प्रस्तावित मूल्यांकन दर सूची में कम की गई है। यानी यहां भी रजिस्ट्री सस्ती हो जाएगी, जिससे प्रॉपर्टी की खरीद सस्ती होगी।