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रेस्त्रां के मेन्यू से निकलकर हाईकोर्ट पहुंचा 'चूर चूर नान', नाम को लेकर हाईकोर्ट ने दिया ये फैसला

Sat, 18 May 2019 03:36 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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पूरे देश में चूर-चूर नान के दीवानों की बड़ी संख्या है, लेकिन बीते दिनों यह रेस्त्रां के मेन्यू से निकलकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया। इस हक को लेकर अदालत में लड़ाई छिड़ गई और अब इस पूरे मामले में अदालत ने एक ऐसा फैसला दिया है जो हर ओर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि 'चूर-चूर नान' और 'अमृतसरी चूर चूर नान' शब्द पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता क्योंकि यह पूरी तरह से सार्वजनिक भाव है।

अदालत ने अपने इस फैसले में स्पष्ट किया कि चूर चूर शब्द का मतलब 'चूरा किया हुआ' होता है और चूर चूर नान का मतलब 'चूरा किया हुआ नान' है इससे ज्यादा इसका कोई अर्थ नहीं है। इसीलिए यह ट्रेडमार्क हस्ताक्षर लेने के लिए योग्य नहीं है।

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क्या है पूरा मामला

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने याचिकाकर्ता परदीप कुमार जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में फैसला सुनाया है। प्रवीण कुमार दिल्ली के पहाड़गंज में एक भोजनालय के मालिक हैं जो नान एवं अन्य खाद्य पदार्थ बेचते हैं।

जैन ने अपनी याचिका में दावा किया था कि 'चूर-चूर नान' भाव पर उनका खास अधिकार है क्योंकि उन्होंने इसका पंजीकरण कराया हुआ है। दरअसल एक अन्य भोजनालय ने इस भाव का इस्तेमाल किया था जिसका जैन ने याचिका में विरोध करते हुए इसे ट्रेडमार्क का उल्लंघन बताया था।

अदालत ने कहा कि अगर पंजीकरण गलत तरीके से दिए गए हैं या इस तरह के सामान्य भाव के लिए आवेदन किए गए हैं तो इसे अनदेखा नहीं कर सकते हैं। इन शब्दों का इस्तेमाल सामान्य बोलचाल में होता है और इस पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता।
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