अगर आपके बच्चे को क्रॉनिक डायरिया है तो उसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। सीलिएक बीमारी के कारण बच्चे को यह परेशानी हो सकती है। इसका तुरंत उपचार जरूरी है। सीलिएक बीमारी के बढ़ते मामले को लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ।
इसमें एम्स गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और मानव पोषण विभाग के डॉ. गोविंद के. मखारिया ने कहा कि सीलिएक बीमारी होने पर बच्चे को बार-बार फ्रैक्चर, टाइप-1 डायबिटीज, थायराइड जैसी समस्या भी हो सकती है। यहां तक कि बच्चों के अलावा बड़े भी इस बीमारी से अछूते नहीं है। दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में इसके सबसे ज्यादा मामले देखने को मिलते हैंं।
यह बीमारी खाद्य पदार्थ में ग्लूटिन की वजह से होती है। इसमें बच्चों को क्रॉनिक डायरिया हो जाता है। आंतों में सूजन होती है। इस बीमारी की चपेट में आने वाले बच्चे कुपोषित, नाटापन, ठीक से पनपना नहीं जैसे दूसरे लक्षण देखने को मिलते हैं।
व्याख्यान में डॉ. आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विवेक दीवान ने सीलिएक बीमारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बात रखी। अस्पताल के बाल रोग विभाग प्रमुख डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि सीलिएक बीमारी से जुड़े मामलों के लिए अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी पीडियाट्रिक क्लीनिक संचालित होता है। इसमें हर हफ्ते तीन-चार नए मामले सामने आते हैं।
क्लीनिक प्रभारी डॉ. वीके मिश्रा ने कहा कि हफ्ते में दो दिन सोमवार और बृहस्पतिवार को दोपहर दो बजे क्लीनिक संचालित होता है। अगर किसी को अपने बच्चे में ऐसे लक्षण दिखते हैं तो बिना इंतजार के बच्चे को अस्पताल में लेकर आएं।