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चीन के भरोसे हो रहा भारत का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस!

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रविवार (21 जून) को जब भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही होगी तो इंडिया गेट और राष्ट्रपति भवन के बीच लगभग 35000 से ज्यादा लोग एक साथ योग करते दिखेंगे।
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असल में इस कार्यक्रम को इतने बड़े पैमाने पर आयोजित करने के पीछे प्रधानमंत्री का खास मकसद है। वह इस कार्यक्रम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाना चाहते हैं।

लेकिन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (GWR) ने इसके लिए एक ऐसी शर्त रख दी है जिसके चलते इस पूरे कार्यक्रम में आपको चीन का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा।

असल में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड ने साफ किया है कि लोगों की संख्या को साफ-साफ दिखाने के लिए जरूरी है कि योग करने वाले हर शख्स को अलग से एक चटाई दी जाए ताकि उसकी गिनती करना आसान हो।
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चीन में बने हैं अधिकतर मैट

योग करने वाले हर शख्स के लिए अलग से मैट की शर्त ने भारत सरकार को चीन पर आश्रित होने के लिए मजबूर कर दिया। असल में इस पूरे कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए महज तीन हफ्ते पहले सरकारी निविदा निकाली गई।

निविदा निकालने के बाद उसे हासिल करने के लिए जो बोली लगी उसमें दिल्ली के तिलक नगर स्थित आर्च कॉनसेप्ट प्राइवेट लिमिटेड (Arch Concept Private Limited) को सफलता मिली।

इवेंट मैनेजमेंट की इस कंपनी को जब पता चला कि इस कार्यक्रम के लिए 37,500 योगा मैट की जरूरत है तो उसके लिए मुसीबत खड़ी हो गई। किसी एक शहर में इतने योगा मैट जमा करना टेड़ी खीर था। इसलिए कंपनी ने देशभर के मैट उत्पादकों से संपर्क किया।

आर्च कॉनसेप्ट के एमडी दिलप्रीत ओबरॉय के मुताबिक चूंकि कार्यक्रम से केवल 20 दिन पहले ही टेंडर मिला। ऐसे में मैट के लिए उन्होंने देश भर के डीलर्स और उत्पादकों से संपर्क किया। कुछ मैट भले ही भारत में बनाए गए हैं लेकिन ज्यादातर चीन में ही निर्मित किए गए हैं।
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मुंबई से लाए जाएंगे एलईडी स्क्रीन

इतने कम समय में योगा मैट हासिल करने के प्रयास में कंपनी ने देश भर के लगभग पचास डीलरों से संपर्क किया। 21 जून के कार्यक्रम को आयोजित करने वाली सरकारी संस्‍था 'आयुष विभाग' के अधिकारी ने बताया कि असल में देश में ज्यादातर मैट बनाने वाली कंपनियों के ऑर्डर चीन से ही मंगाए जाते हैं।

यानि साफ है कि रविवार को रंग-बिरंगे दिखने वाले राजपथ पर जिन चटाइयों का राज होगा वह चीन की बनी हुई होंगी। क्या इस पूरे कार्यक्रम से प्रधानमंत्री के मेड इन इंडिया कार्यक्रम को धक्का नहीं लगेगा।

21 जून को 1400 मीटर फैले राजपथ पर 32 एलईडी स्क्रीन लगाने की व्यवस्‍था भी आर्च कॉनसेप्ट प्राइवेट लिमिटेड को ही करना था।

अकेले दिल्ली में इतने वाटरप्रूफ स्क्रीन उपलब्‍ध नहीं है। कंपनी मुंबई से कुछ स्क्रीन मंगा रही है। हर स्क्रीन के लिए कंपनी सरकार से 35000 रुपये अलग से वसूल करेगी।
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