देश में जब भी कुछ खास होता है तो राजधानी में मतदान प्रतिशत भी बढ़ जाता है। 16वीं लोकसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को हुए मतदान ने एक बार फिर रिकार्ड बनाया।
यह सातवीं बार है कि राजधानी के मतदाताओं ने करीब 65 प्रतिशत मतदान किया है, जबकि अन्य चुनावों में आंकड़ा 58 प्रतिशत भी पार नहीं कर पाया था।
इस बार अधिक मतदान का कारण भाजपा नरेंद्र मोदी की लहर मान रही है तो ‘आप’ राजधानी में हुए भ्रष्टाचार को कम करने की वजह बता रही है।
ये है अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
लोकसभा चुनावों में अब तक का सर्वाधिक मतदान आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में 71.39 प्रतिशत रहा है जबकि सबसे कम मतदान वर्ष 1999 के लोकसभा चुनावों में 43.54 प्रतिशत रहा है।
देश के सबसे पहले दो चुनावों में दिल्ली में मतदान करीब 57 प्रतिशत रहा है। इसके बाद वर्ष 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया और मतदाताओं ने पहली बार 68.75 प्रतिशत मतदान कर कांग्रेस को विजयी बना दिया।
इसके बाद इंदिरा गांधी का विरोध शुरू हो गया व कांग्रेस की अंदरूनी कलह को लेकर पुन: मतदाताओं ने वर्ष 1967 में 69.49 प्रतिशत मतदान कर भारतीय जनसंघ को राजधानी की सात में से छह सींटे सौंप दी।
जब दिखा पाकिस्तान के विरोध का असर
वर्ष 1971 में पाकिस्तान से बंग्लादेशियों के भारत आने व पाकिस्तान का विरोध का असर पूरे देश में देखने को मिला। मतदाताओं ने फिर 65.19 प्रतिशत मतदान कर कांग्रेस का साथ दिया।
जनता पार्टी तीन ही साल में बिखर गई तो मतदाताओं ने वर्ष 1980 में फिर देश में उथलपुथल को कारण मानते हुए 64.89 प्रतिशत मतदान करते हुए कांग्रेस का साथ दिया। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या का मुद्दा रहा और मतदाताओं ने 64.48 प्रतिशत मतदान किया।
इसके बाद के सात चुनावों में मतदान का आंकडा 43.54 से 58 प्रतिशत को पार नहीं कर पाया। इस चुनाव में मतदान का 30 वर्ष का रिकॉर्ड टूट गया और 65 प्रतिशत तक पंहुच गया।