दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उज्बेकिस्तान के एक बच्चे को नया जीवन मिला है। डेढ़ वर्षीय बच्चा दुर्लभ बीमारी ‘लैरिंजियल वैब फोर्मेशन’ से ग्रसित था, जिसकी वजह से उसके श्वसन मार्ग में रुकावट आ रही थी।
दिल्ली आने के बाद डॉ. सुरेश सिंह नरूका ने अपनी टीम के साथ बच्चे की लैरिंजियल वैब की सर्जरी की। डॉक्टरों के अनुसार, यह एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें एयर पाइप यानी वायु मार्ग के अंदर अतिरिक्त टिश्यू बन जाता है, जिस कारण श्वसन मार्ग में हवा के प्रवाह में रुकावट आती है।
अस्पताल के डॉ. अमित किशोर ने बताया कि 6 महीने की उम्र में ही इस बच्चे को संक्रमण हो गया था। इसके चलते उसकी सांस में रुकावट आ रही थी। इस परेशानी के चलते उज्बेकिस्तान के डॉक्टरों ने बच्चे की इमरजेंसी ट्रैकियोस्टोमी सर्जरी की।
इस सर्जरी के जरिये वायु मार्ग में छेद कर दिया जाता है, ताकि मरीज सांस ले सके। हालांकि, यह स्थायी समाधान नहीं था। प्रक्रिया के एक साल बाद तक बच्चे की गर्दन में एक स्थायी छेद हो गया था, जिसकी वजह से वह बोल भी नहीं पाता था। इसीलिए बच्चे को दिल्ली लाया गया।
डॉ. नरूका ने बताया कि जब बच्चे की सर्जरी की, तब उसकी उम्र एक साल तीन महीने थी। उसे बीते 10 जुलाई को भर्ती किया गया और उसी दिन ऑपरेशन किया गया। चूंकि, बच्चा बहुत छोटा था, इसलिए सर्जरी में बहुत सावधानी की जरूरत थी।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सफल होने के बाद बच्चे को विशेष निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों के अनुसार इस तरह के मामलों में समय पर जांच बेहद जरूरी है। इसलिए लोगों को हमेशा जागरूक रहना चाहिए।