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बच्चों में बढ़ रही हिंसात्मक प्रवृति के पीछे है ऑनलाइन गेम्स का हाथ, ऐसे रखें बच्चों को इससे दूर

Mon, 11 Dec 2017 09:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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इंटरनेट पर ऑनलाइन गेम्स बच्चों के दिल और दिमाग पर हावी होते जा रहे हैं। गेम्स के कार्टून के चरित्रों, स्क्रीन पर रंग-बिरंगे कलर के साथ म्यूजिक में बच्चे पूरी तरह से खो जाते हैं।
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उनको लगता है कि यही वास्तविक दुनिया है।  इस बीच अगर उनके मन मुताबिक कुछ ना हो तो वे चिड़चिड़े और हिंसात्मक हो जाते हैं। इस तरह के मामले मनोचिकित्सकों के पास खूब आ रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि  पिछले 1 साल में इस तरह के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। ऑनलाइन गेम्स खेलने से आक्रामक रवैया अपनाने वाले 8 से 10 बच्चे हर हफ्ते ओपीडी में आ रहे हैं।  इनकी घंटों काउंसलिंग की जा रही है।
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गेम्स की वजह से बच्चों में हिंसात्मक रवैया बढ़ा

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मनोचिकित्सक डॉक्टर आरके बंसल ने बताया कि पिछले एक साल में गेम्स की वजह से हिंसात्मक रवैया अपनाने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है। बच्चे इतने परिपक्व नहीं होते हैं कि अच्छे बुरे की परख कर सकें।

मोबाइल गेम्स की दुनिया उनको वास्तविक लगती है। ऐसा नहीं है कि इंटरनेट का उपयोग गलत है। प्रोजेक्ट और पढ़ाई के दौरान इंटरनेट का उपयोग होता है। बशर्ते अभिभावक द्वारा बच्चों को  इंटरनेट चलाने की सही जानकारी दी जाए।

अभिभावकों को बच्चों के फोन इस्तेमाल करने के बाद उसकी हिस्ट्री भी देखनी चाहिए। ताकि ये पता चल सके कि बच्चा किस तरह की चीजें फोन में देख रहा है। अगर बच्चा चिड़चिड़ा हो गया है और हिंसात्मक रवैया अपना रहा है तो बच्चे से बात जरूर करें। बच्चे के साथ दोस्ताना बर्ताव करें।

मरने की बात करता था बच्चा

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डॉक्टर बंसल ने बताया कि कुछ दिनों पहले अभिभावक बच्चे को लेकर आए थे। जो बार- बार मरने की बात कर रहा था। 2 घंटे तक बच्चे की काउंसलिंग की गई, तब पता चला कि वह ब्लूवेल गेम्स खेलता था। गेम में बच्चे का मरने का टास्क था। इस वजह से वो ऐसा कर रहा था।

स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक
गेम्स के चक्कर में बच्चे आउटडोर एक्टिविटीज बिल्कुल बंद कर दी है। बैठे- बैठे गेम्स खेलते रहते हैं। इससे बच्चे मोटापे का शिकार हो जाते हैं। इससे कई तरह की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। मोटापा बच्चों में डायबिटीज का प्रमुख कारण है।
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इस तरह बच्चों को बचाएं 

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- अभिभावक ध्यान दें कि वो मोबाइल फोन पर क्या कर रहा है।
- आउटडोर गेम्स को बढ़ावा दें और उसको इसके फायदे बताएं।
- बच्चा इंटरनेट पर क्या करता है और कौन सा गेम खेलता है, उस पर ध्यान दें।
- अगर बच्चा ज्यादा वक्त इंटरनेट पर बिता रहा है और उसके बर्ताव में बदलाव आया है तो उससे बात करें।
- अगर बच्चा अकेला रहे तो उससे बात करें। 
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