हाईटेक सिटी नोएडा में एक ओर जहां आलीशान इमारतें हैं, जिनमें आधुनिक शिक्षा लेने के लिए कई राज्यों से छात्र आते हैं।
वहीं दूसरी ओर इसी शहर में एक तबका और भी है, जो शिक्षा से वंचित है। इस तबके के बच्चे पढ़ाई तो दूर पेट की खातिर अपना बचपन तक भूल बैठे हैं।
इनमें कई तो ऐसे (आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रेन) हैं, जिन्होंने आज तक स्कूल नहीं देखा है। इनके अलावा ऐसे (ड्रॉप आउट) बच्चे भी हैं, जिन्हें दाखिला लेने के बाद अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी। लिहाजा शिक्षा के अधिकार कानून की बात इनके लिए बेमानी साबित होती दिख रही है। पेश है एक रिपोर्ट...
केस-1
स्कूल इनके लिए है सपना
सेक्टर-15, 01.00 बजे दोपहर
सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन की सीढ़ियों पर टहलता पांच साल का राजेश लोगों को निहार रहा था। उसके वहां होने का मकसद किसी न किसी से दो चार रुपये पाने का था। पूछने पर उसने बताया कि वह कभी स्कूल नहीं गया। उसके पिता किसी कंपनी में काम करते हैं। वह सेक्टर-2 में अपने पिता के साथ रहता है। उसका कहना है कि उसे किसी ने न तो स्कूल जाने को कहा और न ही पढ़ाई करने को कहा।
केस-2
काम की खातिर स्कूल से दूर
सेक्टर-60, 02.00 बजे दोपहर
एक ठेली पर सब्जियों की बोरी ले जाता 12 साल का इरफान गर्मी के कारण एक पेड़ के नीचे सुस्ता रहा था। जब स्कूल जाने के बारे में पूछा तो उससे हंसते हुए बताता है कि वह कभी स्कूल नहीं गया। वह और उसके माता-पिता सब्जियों की ठेली लगाते हैं। हालांकि उसने बताया कि उसके छोटे भाई बहन पढ़ार्ई करते हैं। स्कूल में दाखिले के सवाल पर उसने कहा कि अब तो मुझे काम करना है। मेरे भाई बहन पढ़ जाएं। यही उसकी इच्छा है।
केस-3
कमाने को घर से आया इतनी दूर
सेक्टर-59, 03.00 बजे दोपहर
एक दुकान पर काम कर रहा 10 साल का मुखदेव बिहार के मधुबनी जिले से कुछ महीने पहले नोएडा आया। गांव में भी उसने कभी स्कूल में दाखिला नहीं लिया। आर्थिक कमी के कारण वह अपने भाई के पास नोएडा आ गया। दोनों भाई एक दुकान पर मेहनत करके पैसे कमाते हैं। स्कूल में दाखिले के सवाल पर उसने कहा कि पढ़ाई में मन नहीं लगता। वह यहां काम करने आया है।