केंद्र सरकार के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का अधिकार अमल में लाने के बावजूद भी देश का भावी भविष्य कह जाने वाले बच्चें आज भी बाल मजदूरी का ग्रास बनकर दो जून की रोटी तलाशने पर मजबूर है।
हर वर्ष बचपन की यादों को ताजा करने के लिए बाल दिवस का आयोजन किया जाता है। यह बच्चों के लिए उल्लास में डूब जाने का दिन है। स्कूलों में भी यह दिन बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है।
लेकिन इसके बावजूद आज भी हजारों नौ निहाल बाल मजदूरी में फंसे हुए है। कस्बे के ढाबे, होटलों, चाय की दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों पर छोटे छोटे बच्चे खुलेआम मजदूरी करते देखे जा सकते है।
भावी भविष्य कहे जाने वाले बच्चे आज भी बाल मजदूरी का ग्रास बनकर विभिन्न प्रतिष्ठानों पर अपना भविष्य तलासने पर मजबूर है। बाल मजदूरी समाज ही नहीं पूरे देश के लिए अभिशाप है। जिसपर हर हालत में अंकुश लगना चाहिए।