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पांच साल से पूरी नींद नहीं ले पाई है बच्ची

Sat, 16 Mar 2019 12:05 AM IST
राजेश सैनी परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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एपर्ट सिंड्रोम से पीड़ित मेघा
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बड़ी आंखें, खराब दांत, सामान्य इंसान की तुलना में सिर का आकार दोगुना, दिल की रक्त धमनियां और श्वास नली सिकुड़ने के अलावा चेहरे की कोशिकाएं विकृति की शिकार। ये स्थिति है ‘एपर्ट सिंड्रोम’ नामक बीमारी से ग्रस्त पांच वर्षीय बच्ची मेघा की। वह न तो ठीक से सांस ले पाती है और न ही उसके दिल को पर्याप्त रक्त मिल पाता है। सिर में पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण इसकी तड़प रोंगटे खड़े कर देती है। पांच साल से बच्ची पूरी नींद नहीं ले पाई है। 

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राजस्थान के अलवर जिले की मूल निवासी मेघा जन्म से ही अनुवांशिक रोग ‘एपर्ट सिंड्रोम’ की शिकार है। इसका दंश झेलने वाले रोगी भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में बस कुछ ही हैं। गर्भावस्था के दौरान ही जीन में बदलाव होते हैं, जिसके चलते शारीरिक बनावट और कोशिकाएं सिकुड़ने के कारण इनका उपचार भी काफी जटिल हो जाता है।

यही वजह है कि अब एम्स पहुंची मेघा को कई विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर इलाज देने का फैसला लिया है। मेघा ने आज तक कभी भी पूरी नींद नहीं ली है। एपर्ट सिंड्रोम के कारण इसकी श्वास नलिका सिकुड़ी हुई है। जिस कारण बिस्तर पर लेटते ही इसकी सांसें बंद होने लगती हैं। दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और सांसें उखड़ने लगती हैं। अब उसे बिस्तर पर जाने से भी डर लगने लगता है। रात में वह इसी डर से नहीं सोती कि कहीं उसकी मौत न हो जाए। बीमारी के साथ-साथ नींद पूरी न होने की वजह से उसकी आंखों का आकार भी सामान्य इंसान की तुलना में काफी बड़ा है। 
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उसके पिता बीर सिंह बताते हैं कि गुरुग्राम में एक कंपनी में नौकरी के दौरान मेघा का जन्म हुआ। कुछ समय वह समझ नहीं पाए, लेकिन चंद माह बाद डॉक्टरों से जांच कराने पर बीमारी का पता चला। तब से लेकर आज तक वे अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। मेघा के जन्म के बाद वे काफी डर भी गए थे। डॉक्टरों ने उन्हें मेघा की बीमारी के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने अपना और पत्नी का उपचार कराया। इस बीच दो भाई-बहन और हुए, जो कि स्वस्थ हैं। 

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एम्स के चार विभागों ने शुरू किया उपचार
इलाज के लिए एम्स पहुंची मेघा को कार्डियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, मैक्सिलोफेशियल, ईएनटी और पल्मोनरी विभाग के डॉक्टरों ने उपचार करने का फैसला लिया है। एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि सबसे पहले पल्मोनरी व ईएनटी विभाग के डॉक्टर एपर्ट सिंड्रोम की वजह से सिकुड़ी श्वास नली को सर्जरी के जरिए ठीक करना चाहते हैं। ताकि बच्ची पर्याप्त नींद ले सके। साथ ही बच्ची के दिल की रक्त धमनियों को भी ठीक करना जरूरी है। जन्म के साथ ही इसके दिल को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पा रहा है। 

सिर और चेहरे की विकृति में हैं सर्वाधिक चुनौती
डॉक्टरों के अनुसार, एपर्ट सिंड्रोम का पहला मरीज वर्ष 1906 में मिला था। भारत में अब तक बमुश्किल 10 या 12 मरीज ही देखने को मिले हैं। हालांकि, इस बीमारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी शोध हुए हैं। डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके सिर और चेहरे की विकृति को दूर करना है। एम्स के पास इस चुनौती से जुड़ी तमाम सुविधाएं हैं। इसलिए एम्स ही बच्ची का उपचार करेगा। 

पहले भी एक मरीज को ठीक कर चुका है एम्स
यूं तो इस बीमारी का मरीज पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सकता लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि एम्स पहले भी ऐसे एक मरीज का इलाज कर चुका है। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसकी विकृति को दूर किया था। हालांकि, उसकी उम्र करीब 30 वर्ष के आसपास थी। जबकि मेघा पांच साल की है।
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