एम्स के चार विभागों ने शुरू किया उपचार
इलाज के लिए एम्स पहुंची मेघा को कार्डियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, मैक्सिलोफेशियल, ईएनटी और पल्मोनरी विभाग के डॉक्टरों ने उपचार करने का फैसला लिया है। एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि सबसे पहले पल्मोनरी व ईएनटी विभाग के डॉक्टर एपर्ट सिंड्रोम की वजह से सिकुड़ी श्वास नली को सर्जरी के जरिए ठीक करना चाहते हैं। ताकि बच्ची पर्याप्त नींद ले सके। साथ ही बच्ची के दिल की रक्त धमनियों को भी ठीक करना जरूरी है। जन्म के साथ ही इसके दिल को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पा रहा है।
सिर और चेहरे की विकृति में हैं सर्वाधिक चुनौती
डॉक्टरों के अनुसार, एपर्ट सिंड्रोम का पहला मरीज वर्ष 1906 में मिला था। भारत में अब तक बमुश्किल 10 या 12 मरीज ही देखने को मिले हैं। हालांकि, इस बीमारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी शोध हुए हैं। डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके सिर और चेहरे की विकृति को दूर करना है। एम्स के पास इस चुनौती से जुड़ी तमाम सुविधाएं हैं। इसलिए एम्स ही बच्ची का उपचार करेगा।
पहले भी एक मरीज को ठीक कर चुका है एम्स
यूं तो इस बीमारी का मरीज पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सकता लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि एम्स पहले भी ऐसे एक मरीज का इलाज कर चुका है। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसकी विकृति को दूर किया था। हालांकि, उसकी उम्र करीब 30 वर्ष के आसपास थी। जबकि मेघा पांच साल की है।