चिकनगुनिया, डेंगू व वायरस संबंधित इन बीमारियों का असर सिर्फ हमारे प्रतिरोधक क्षमता पर ही नहीं पड़ता। बल्कि यह हमारी आंखों की रोशनी भी भी पड़ता है।
यह एक वायरस जनित रोग है। इसका असर आंखों पर पड़ना लाजगी है।
लेकिन यदि समय रहते चिकित्सीय परामर्श नहीं लिया गया तो मरीज अंधता का शिकार भी हो सकता है। अस्पतालों में इस तरह के मरीज भी देखने को मिल रहे हैं। जिनका बुखार तो उतर गया, लेकिन उनकी आंखों में वायरस का संक्रमण हो चुका है।
आइटेक विजन सेंटर की नेत्र रोग विशेषज्ञ श्रीदेवी मुंडा ने बताया कि ऐसी अवस्था में आंखों पर इनके वायरस का प्रतिकूल प्रभाव कई बार नजर आने लगता है। आंखों का सफेद हिस्सा लाल होने लगता है।
आंखों के पिछले हिस्से में दर्द की समस्या होती है। लेकिन हर बार दर्द हो यह भी जरूरी नहीं। ऐसे मामलों में आंखों की रोशनी भी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत आंखों के पिछले हिस्से में तेज दर्द होता है।
खास बात यह है कि पैरासिटामोल या एनएसएआईडी लेने से बुखार और दर्द की समस्या में राहत अवश्य मिलती है। लेकिन कुछ देर बाद आंखों में समस्या दोबारा शुरू होने लगती है।
आंखों की रोशनी में अगर थोड़ी सी भी कमी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। बतातें चले कि सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 3100 मरीजों की ओपीडी चल रही है।
इसमें अधिकांश मरीज बुखार व वायरल संबंधित रोग से ग्रसित है। जिनका इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल के नेत्र चिकित्सक डॉ. शमीम ने भी यह माना की वायरस जनित रोग का असर आंखों पर पड़ता है। जिनको दवाइयों से ठीक किया जा सकता है। लेकिन देरी होने पर यह रोग आंखों के लिए काफी खतरनाक हो सकता है।