दिल्ली के चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू से प्रवासी पक्षियों की मौत का असर चिकन खाने वालों पर पड़ा है। कई मल्टीनेशनल कंपनियों के मेन्यू से चिकन गायब हो गया है। कंपनी की ओर से ई-मेल भेजकर बर्ड फ्लू पूरी तरह से खत्म नहीं होने तक चिकन डिश नहीं परोसे जाने की बात कही गई है।
इसके साथ ही कर्मचारियों से चिकन नहीं खाने की अपील भी की गई है। वहीं, बर्ड फ्लू के कारण चिकन का कारोबार भी प्रभावित हुआ है। अमूमन कंपनियों में थोक के भाव चिकन खरीदा जाता है, लेकिन वहां खाने पर बंदिश और मेन्यू से गायब होने पर मांग मेें 30 फीसदी तक कमी आई है।
इसकी वजह से थोक मुर्गे के दामों में 20 फीसदी की गिरावट हो गई है। गूगल, एसेंचर, अमेरिकन एक्सप्रेस, जेनपेक्ट जैसी कंपनियों में वर्किंग टाइम में खाना दिया जाता है। गूगल में काम करने वाले एक वरिष्ठ टीम लीडर बताते हैं कि दो दिन पहले सभी को ई-मेल भेजकर चिकन नहीं बनने की सूचना दी गई है। चिकन नहीं खाने को भी कहा गया है।
'खत्म हो जाएगी पॉल्ट्री इंडस्ट्री'
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प्रोफेशनल नेटवर्क ग्रुप ऑफ इंडिया संस्थापक अशफाक अहमद का कहना है कि कर्मचारी के बीमार पड़ने से वर्कलोड और वर्क कल्चर दोनों प्रभावित होता है। इस वजह से इस तरह के निर्णय लेने पड़ते हैं।
वहीं, पॉल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव मेंबर और सदस्य डॉ. सब्बीर अहमद खान का कहना है कि अगर इसी तरह बर्ड फ्लू की दहशत रही तो पॉल्ट्री इंडस्ट्री खत्म हो जाएगी। बर्ड फ्लू प्रवासी पक्षियों में है। सीधे तौर पर चिकन से कोई वास्ता नहीं है।
जांच के नहीं हैं इंतजाम
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बर्ड फ्लू की जांच के लिए हरियाणा में कोई माकूल बंदोबस्त नहीं हैं। किसी भी लैब में टेस्ट नहीं होने की वजह से इसकी पुष्टि करना संभव नहीं है। बर्ड फ्लू की पुष्टि के लिए केंद्रीय स्तर पर केवल भोपाल में लैब है, जहां पशु-पक्षियों में एच1एन1 वायरस की पुष्टि होती है।
पॉल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रशासक व विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार बताते हैं कि पक्षियों या ब्रॉयलर से इंसान में वायरस नहीं फैलता है, केवल भय दिखाकर पॉल्ट्री फॉर्म को डराया जा रहा है।