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बुखार की जांच, चालान काटने के नाम पर ठगी, कोरोना काल ने बदल दिए अपराध के तरीके 

Sat, 07 Nov 2020 12:56 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी राजीव कुमार, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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जी हां, कोरोना काल में बदमाशों ने ठगी का तरीका बदल दिया है। अब वह नए-नए तरीके अपनाकर घटनाओं का अंजाम दे रहे हैं। कहीं कोविड चालान काटने के नाम पर ठगी हो रही है तो कहीं जांच करने के नाम पर। इसके अलावा ऑन लाइन ठगी के मामलों में भी तेजी आई है। दिलचस्प यह कि शक के दायरे में आने से बचने के लिए बदमाश पुलिस की वर्दी या कोविड जांच के लिए पूरी तरह किट पहने रहते हैं। इससे घटना के समय लोगों को किसी तरह का शक नहीं होता। पता चलते-चलते ठग उनसे बहुत दूर चला गया होता है।

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इसके अलावा ऑनलाइन ठगी की शिकायतें भी बढ़ी हैं। फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को नौकरी का झांसा दिया जा रहा है। इसी तरह ज्यादातर ऐसे लोग ऑनलाइन ठगी के शिकार हो रहे हैं जो गूगल पर सर्च कर कस्टमर केयर का नाम लेकर उसपर अपनी शिकायतों को लेकर बात करते हैं। ऐसी घटनाओं में देखा जा रहा है कि ऑनलाइन कस्टमर केयर पर दिये गये ज्यादातर नंबर फर्जी होते हैं।

ठगी के अजब-गजब के तरीके
1. पुलिस की वर्दी पहन कर ठगी
कोरोना काल में ठग पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल कर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। हाल के दिनों ने पुलिसकर्मियों ने एक महिला समेत दो नकली पुलिसकर्मियों को पकड़ा है जो पुलिस की वर्दी पहन कर सरेआम लोगों का कोविड चालान कर रहे थे। तिलक नगर में नकली महिला पुलिसकर्मी तो महेंद्र पार्क में एक नकली पुलिसकर्मी ऐसे लोगों का चालान कर रहे थे, जो मास्क व सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे थे। इसी तरह करोलबाग में तलाशी का बहाना कर ज्वेलर से लाखों के जेवरात की ठगी का मामला अकसर सामने आता रहता है। वहीं पुलिस की चेकिंग बताकर कश्मीरी गेट व धौलाकुंआ में ठग वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
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2. बुखार जांचने का बहाना कर जेवरात की ठगी
पश्चिम और द्वारका जिले में ऐसी वारदात सामने आयी है, जिसमें कोविड टेस्ट के लिए बुखार जांचने का बहाना बनाकर ठग महिलाओं के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। हरिनगर में डॉक्टर के पास जा रही गुरमीत को ठगों ने रोककर बुखार टेस्ट करवाने के लिए कहा और इसी दौरान हाथ में पहने कड़े को उतार कर रख लेने की बात कहकर कड़ा उड़ा लिया। वहीं द्वारका में पूनम का ठगों ने न केवल बुखार टेस्ट किया बल्कि कागजात पर उनका पूरा ब्यौरा लेने के बहाने सारे जेवरात उतरवा कर रख लिया और उन्हें नकली जेवरात देकर घर भेज दिया।
 

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3. कस्टमर केयर पर बात करने के बहाने ठगी
कोरोना काल में ऑनलाइन को बढ़ावा मिला है। ठगों ने इसको भी अपना हथियार बना लिया है। खासकर ऐसे लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है जो किसी की कंपनी के कस्टमर केयर के नंबर गूगल के जरिए प्राप्त कर उसपर बात करते हैं। इसपर ज्यादातर शिकायत ऑनलाइन पैमेंट नहीं होने की होती है। बातचीत के दौरान नकली कस्टमर केयर कर्मचारी बना व्यक्ति पीड़ितों को लिंक भेजता है, जिसके जरिए वह उनके खाते से हजारों से लेकर लाखों रुपये पर हाथ साफ कर देते हैं।

4. फर्जी वेबसाइट के जरिए नौकरी का झांसा देकर ठगी
हाल के दिनों में ठग सरकारी व निजी कंपनी से मिलता जुलता फर्जी वेबसाइट बनाकर उसपर नौकरी का विज्ञापन देते हैं और फिर बड़े पैमाने पर उसपर आवेदन करने वाले लोगों से लाखों और करोड़ों रुपये ठग लेते हैं। साइबर सेल ने हाल ही में ऐसे गैंग का खुलासा किया है जिसने जन कल्याण संस्थान के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर 27 हजार युवाओं को ठगी का शिकार बनाया। इसी तरह हवाई अड्डे की निर्माण करने वाली कंपनी जीएमआर ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज करवायी है कि कुछ लोगों ने कंपनी का फर्जी वेबसाइट बनाकर उसपर नौकरी का विज्ञापन देकर लोगों से लाखों की ठगी कर रहे हैं।

1 जनवरी 2020 से 31 अगस्त 2020 तक के ठगी के मामले
मामले दर्ज गिरफ्तारी
धोखाधड़ी  3254 779
जालसाजी  177 131


केस नंबर-1
द्वारका साउथ इलाके में पूनम पति के साथ सुबह की सैर पर गयी थी। इसी दौरान दो युवकों ने कोविड जांच का बहाना बनाकर बुखार जांच करने की बात कही। युवकों ने उन्हें पार्क में जेवरात पहनकर नहीं आने की नसीहत दी और जेवरात को खोलकर उनके चुन्नी में बांध दिया। घर जाने पर पता चला कि वह असली नहीं बल्कि नकली जेवरात थे।

केस नंबर-2
महेंद्र पार्क इलाके में उपेंद्र सिंह नाम का युवक नकली पुलिसकर्मी बनकर लोगों का कोविड चालान कर रहा था। आशंका होने मौके पर पहुंची पुलिस ने उसको धर दबोचा। उसके पास से पुलिस की वर्दी और चालान की रकम भी पुलिस ने बरामद की है।

धोखाधड़ी और जालसाजी के मामलों की जांच के लिए साइबर यूनिट है। साथ ही हर जिले में साइबर सेल है जो लगातार इन मामलों की जांच कर आरोपियों की गिरफ्तारी करती है। दिल्ली पुलिस की ओर से लगातार विज्ञापन के जरिए लोगों को जागरूक किया जाता है ताकि वह ठगों का शिकार होने से बच सकें।
अनिल मितल, अतिरिक्त जन संपर्क अधिकारी, दिल्ली पुलिस

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