दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने सीएनजी पंप लगवाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने नजफगढ़ निवासी भट्टा व्यवसायी से 2.39 करोड़ रुपये ठग लिए थे।
आरोपियों ने विभिन्न फर्जी बैंक खातों में 1.79 करोड़ रुपये और नकद में 60 लाख रुपये लिए थे। गिरफ्तार आरोपी अमित कुमार पांडे, अमरेंद्र कुमार और नोएडा निवासी अमर सिंह के कब्जे से फर्जी आईजीएल पत्र, एनओसी, चालान, एरिया ब्लॉकिंग फीस प्रमाण पत्र, दो मोबाइल फोन और सिमकार्ड बरामद किए गए हैं। आरोपियों में अमर सिंह पेट्रोलियम मंत्रालय का पूर्व कर्मचारी है।
आईएफएसओ पुलिस उपायुक्त डॉ. हेमंत तिवारी ने बताया कि भट्टा व्यवसायी ने 27 मार्च 2024 को आईएफएसओ में शिकायत दी थी कि कुछ लोगों ने उससे 2.39 करोड़ रुपये ठग लिए हैं। आरोपियों ने उसे उसकी जमीन पर सीएनजी पंप लगवाने का झांसा दिया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि 2021 में पेट्रोल-सीएनजी पंप आवंटन प्रक्रिया के बारे में ऑनलाइन जानकारी लेने के दौरान उससे दो व्यक्तियों अमरेंद्र और अमित पांडे, ने संपर्क किया, जिन्होंने खुद को इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) का समन्वयक और एजेंट बताया।
उन्होंने कम से कम औपचारिकताओं के साथ सीएनजी पंप लगाने का झांसा दिया। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज़ पंजीकरण प्रमाणपत्र, बैंक खाता विवरण और जीएसटी नंबर के साथ एक चालान तैयार किया और इसे शिकायतकर्ता को भेजा। उससे 2.39 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
मामला दर्ज कर एसीपी जयप्रकाश के नेतृत्व में सब इंस्पेक्टर धनञ्जय दुबे व अन्य की टीम ने जांच शुरू की। धोखाधड़ी का ये मामला लगभग तीन साल पुराना था।
एसआई आशीष दुबे ने धोखाधड़ी में शामिल बैंक खातों का विवरण एकत्र किया और पैसे के लेन-देन का पता लगाया। आरोपियों द्वारा प्रस्तुत पंजीकरण और आवंटन दस्तावेज को आईजीएल से सत्यापित करने पर उन्हें फर्जी पाया गया। इसके बाद मोबाइल सर्विलांस से अमित कुमार पांडे, अमरेंद्र कुमार और अमर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पहचान से बचने के लिए अन्य व्यक्तियों के नाम पर जारी किए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने शिकायतकर्ता को दस्तावेज़ भेजने के लिए फर्जी ईमेल आईडी भी बनाई थी। अमित कुमार पांडे गिरोह का मास्टरमाइंड है। उसने फर्जी पंजीकरण और आवंटन दस्तावेज़ बनाए थे, जबकि अमरेंद्र कुमार ने शिकायतकर्ता से नकदी एकत्र की थी। अमर सिंह, (जोकि पेट्रोलियम मंत्रालय का पूर्व कर्मचारी था) ने मध्यस्थ के रूप में काम किया।