2013 में निकाली गई बिल्डर प्रोजेक्ट्स में सस्ते फ्लैटों की स्कीम के करीब 3500 आवंटियों के लिए अपने घर का इंतजार साल दर साल कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है।
बिल्डरों ने अब तक पूरी तरह से न तो आवंटियों को आवंटन लेटर दिया है और न ही जीडीए को फ्लैटों की लिस्ट। जिन तैयार फ्लैटों की लिस्ट दी भी गई है, उनमें सिर्फ स्ट्रक्चर ही बनकर तैयार हुआ है।
इन फ्लैटों में बिजली-पानी-रोड आदि जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में इनको रहने के लिहाज से बनाने में करीब एक साल का समय लग सकता है।
वहीं, योजना के दूसरे चरण में शामिल 2000 मकानों का तो अभी ड्रा तक नहीं हो सका है। रीयल एस्टेट सेक्टर में मंदी के चलते हाल-फिलहाल इनका निर्माण शुरू होने की भी उम्मीद नहीं है।
बिल्डर प्रोजेक्ट में सस्ते फ्लैटों की स्कीम के 5000 फ्लैटों में से 3500 ईडब्लूएस-एलआईजी का आवंटन किया गया है। इसके साथ ही जीडीए ने बीते वर्ष 2000 फ्लैटों की स्कीम और लांच कर दी थी। इस स्कीम में करीब पांच हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किए हैं।
रीयल एस्टेट की मंदी भी बनी वजह
प्रोजेक्ट के फ्लैट न बिकने के कारण बिल्डर सस्ते फ्लैट नहीं बना रहे हैं। मौके पर निर्माण न होने के कारण जीडीए के नोटिसों के बावजूद अब तक बिल्डरों ने फ्लैटों की सूची नहीं दी है। इससे दूसरे चरण का ड्रा अटका है।
रेट पर अटक गया मामला
सफल आवंटियों को अब तक पूरी तरह से आवंटन पत्र भी नहीं मिले हैं। दरअसल, फ्लैट की कीमत जीडीए की ओर से 2.40 (ईडब्लूएस) और 5.10 लाख (एलआईजी) की निर्धारित थी।
बीते वर्ष ड्रा के बाद कुछ बिल्डरों ने आवंटन पत्र देने की एवज में आवंटियों से अधिक कीमत मांगी। बिल्डरों ने ईडब्लूएस की कीमत 3.90 और एलआईजी की 8.40 लाख मांगी। जीडीए ने कार्रवाई शुरू की तो बिल्डर हाईकोर्ट पहुंच गए। मामला फिलहाल कोर्ट में है।