भारतवर्ष में जिस कला के दर्शन केवल छत्तीसगढ़ में होते हैं उस डोकरा कला को अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में दर्शाया जा रहा है।
स्टॉल नंबर-794 पर जयराम सोलंकी ने डोकरा से बनाई वस्तुओं को प्रदर्शित किया है, जिसने लोगों को अपना दीवाना बना रखा है। लकड़ी के फ्रेम में डोकरा कला के पीतल के बारीक कार्य ने लोगों को सहज ही अपनी ओर खींचने में सफलता पाई है।
डोकरा कला के शिल्पकार जयराम छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं, जिन्होंने इस कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने के लिए सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में स्टॉल लगाई है। वह पहले भी इस मेले मे छह बार अपनी कला को प्रदर्शित कर चुके हैं। पिछले साल जयराम सोलंकी को बेस्ट क्राफ्ट का अवार्ड भी मिल चुका है।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति को उकेरते हैं लकड़ी पर
डोकरा कला में लकड़ी के फ्रेम में पीतल के प्रयोग से सुंदर आकृतियां बनाई जाती हैं। इनमें प्रमुख तौर पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं सभ्यता को उकेरने का कार्य किया जाता है। मानवीय आकृतियों में इस प्रदेश के रीति-रिवाज एवं त्योहार और अवसरों को प्रदर्शित किया जाता है।
सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में शिल्पकार जयराम सोलंकी ने 400 रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक की कलाकृतियों को प्रदर्शित किया है। डोकरा कला से एक ट्री ऑफ लाइफ नाम से पेड़ भी बनाया गया है, जिसे छोटे रूप से विशाल आकृति के रूप में बनाया गया है।
सबसे बड़े वृक्ष (ट्री ऑफ लाइफ) का मूल्य 80 हजार तथा मध्य आकार के पेड़ की कीमत 35 हजार रुपये बताई जाती है। इन्हें घरों इत्यादि स्थानों पर साज-सज्जा के रूप में प्रयोग करने को शुभ माना जाता है।