-बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित, अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों का इजाफा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
बदलते मौसम में पोलन (परागकण) के कारण एलर्जी होने से लोगों में आंख-गले की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। इससे सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग प्रभावित है। किसी का गला खराब है तो किसी को बार-बार छींक आ रही, आंख में खुजली होने और पानी आने की दिक्कत बनी है। ऐसे लक्षणों को लेकर अस्पतालों की ओपीडी में 10 से 20 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं।
सफदरजंग अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज रंजन ने बताया कि बदलते मौसम में पेड़-पौधों से निकलने वाले परागकण की हवा में मात्रा बढ़ जाती है। इसके कारण बड़ी तादाद में लोग एलर्जी की समस्या से जूझते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर आंखों और नाक में देखने को मिलता है। कुछ मामलों में गंभीर स्थिति होने पर गला भी खराब हो जाता है। इसको एलर्जिक राइनाइटिस (हे फीवर) कहा जाता है। पोलन के संपर्क में आने पर शरीर में हिस्टामिन का स्तर बढ़ जाता है। अस्पताल की ओपीडी में एलर्जी के कारण आंख में होने वाली दिक्कतों के 20 फीसदी मरीज बढ़ गए है।
डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार ने जब मौसम न ज्यादा गर्म, न अधिक ठंडा और बरसात की स्थिति होने पर पोलन की मौजूदगी से एलर्जी संबंधी दिक्कतें सर्वाधिक देखने को मिलती है। अस्पताल की ओपीडी में सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग उपचार के लिए पहुंच रहे है। इस मौसम में करीब दस फीसदी मरीजों में इजाफा हुआ है। नाक बंद होने, छींक आने, सूखी खांसी, गले में दर्द, बुखार जैसे लक्षणों के साथ मरीज पहुंच रहे है। हे-फीवर और वायरल फीवर के लक्षण एक जैसे होते है। लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है। एसी के इस्तेमाल से अभी बचना चाहिए।
क्या होता है पोलन : पोलन फूलों में अति सूक्ष्म पाउडर के जैसा तत्व होता है। इसे पोलन या परागकण कहते है। यह फूलों या किसी प्रकार की वनस्पति को निषेचित करने के काम करता है। यह हवा में मौजूद इतने सूक्ष्म होते है कि सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते है।
पोलन के संपर्क में आने में यह होती है दिक्कत
-आंखों में खुजली, लालिमा और पानी आना
-बार-बार छींक आना
-नाक से पानी बहना, नाक बंद होना
-गले में खराश, सूखी खांसी और दर्द
-सिरदर्द
इन बातों का रखें ध्यान
-पार्क में जाते समय चेहरे पर मास्क लगाकर रखें
-भीड़-भाड़ में जाने के दौरान भी मास्क जरूरी है
-बाहर से घर वापस लौटने पर आंखों को ठंडे पानी से धोएं
-धूल वाली जगह पर जाने से बचें
-पोषणयुक्त आहार ले और पर्याप्त पानी पीयें
-बिना डॉक्टर के परामर्श के कोई दवा न लें