टेरी के डब्ल्यूएसडीएस के उद्घाटन समारोह में पहुंचे मंत्री भूपेंद्र यादव व गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भरत जगदेव
परिवर्तन : सतत विकास के लिए दृष्टि, स्वर और मूल्य है इस साल की थीम
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। परिवर्तन केवल एक विषय बनकर न रह जाए, बल्कि इसे वैश्विक आंदोलन बनाया जाए। पिछले 25 वर्षों में डब्ल्यूएसडीएस ग्लोबल साउथ से उभरकर एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है, जहां सरकारें, उद्योग जगत, शिक्षाविद, नागरिक समाज और समुदाय एक साथ आकर सतत विकास के मुद्दों पर विचार करते हैं। ये बातें केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कही। वे राजधानी में आयोजित द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के 25वें विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस-2026) के उद्घाटन समारोह के दौरान बोल रहे थे।
एक निजी होटल में आयोजित यह रजत जयंती संस्करण 27 फरवरी तक चलेगा। सम्मेलन में दुनिया भर से नेता, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए हैं। इस वर्ष सम्मेलन की थीम परिवर्तन : सतत विकास के लिए दृष्टि, स्वर और मूल्य है।
मंत्री ने कहा कि अब समय केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई का है। उन्होंने कहा कि आने वाले 25 वर्ष क्रियान्वयन और जवाबदेही के होने चाहिए।
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जलवायु लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण : डॉ. भरत जगदेव
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भरत जगदेव ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब यह शिखर सम्मेलन शुरू हुआ था, तब मुख्य उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना था, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत ठोस कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के पीछे हटने से जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। डॉ. जगदेव ने बताया कि गुयाना ने 2009 में लो-कार्बन डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी अपनाई, जिसके तहत वनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। साथ ही, देश ने ‘फॉरेस्ट कार्बन क्रेडिट’ बेचकर आर्थिक लाभ भी कमाया।
असली चुनौती जमीनी स्तर पर काम करने की : नितिन देसाई
टेरी के अध्यक्ष नितिन देसाई ने कहा कि असली चुनौती जमीनी स्तर पर काम करने की है। वहीं, महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर काफी चर्चा हो चुकी है, अब भारत और वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। इस मौके पर हिम-कनेक्ट पहल की शुरुआत की गई, जो हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास और हरित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है।