-नर्सिंग संगठन की याचिका को हाईकोर्ट ने केंद्र के सामने प्रतिनिधित्व माना, फैसला बताने का भी निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन (एनएनएमसी) के गठन में हो रही देरी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दो महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन (आईपीएनए) की याचिका को केंद्र सरकार के सामने दिए गए प्रतिनिधित्व के रूप में लेने को कहा, साथ ही फैसले की जानकारी याचिकाकर्ता को देने का निर्देश भी दिया।
याचिका में कहा गया कि एनएनएमसी अधिनियम, 2023 लागू होने के बावजूद नए आयोग का गठन नहीं हुआ है। केंद्र ने 14 मार्च 2024 को सदस्यों के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई। जुलाई 2026 में आरटीआई के जवाब में भी यह पुष्टि हुई कि आयोग में किसी की नियुक्ति नहीं है। याचिका में आरोप लगाया कि इस देरी से देशभर में नर्सिंग व मिडवाइफरी के नियमन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
आईपीएनए ने कहा कि पुराना इंडियन नर्सिंग काउंसिल काम कर रहा है, जबकि कानून में उसकी जगह नया आयोग बनाने का प्रावधान है। अदालत ने इस स्तर पर आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन केंद्र को दो महीने का समय देते हुए कहा कि यदि संगठन फैसले से संतुष्ट नहीं होता तो वह फिर से हाईकोर्ट का रुख कर सकता है।