देशभर के शहरी क्षेत्रों के बाजारों को राहगीरों के अनुकूल बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। केंद्रीय शहरी आवास व कार्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बाकायदा इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। इसके तहत अगले छह महीने में बाजारों का बुनियादी ढांचा राहगीरों के अनुकूल बनाना है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने सभी राज्यों, शहरों और नगर निगमों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। शुरुआती दौर में दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में कम से कम 3 बाजारों को इसके लिए चुना जाएगा। इसमें पैदल मार्ग का निर्माण करने के लिए उन्हें अधिसूचित कर सकते हैं, जबकि दस लाख से कम आबादी वाले शहर पैदल मार्ग बनाने के लिए कम से कम एक बाजार का चयन कर सकते हैं।
खास बात ये है कि कोरोना काल को मंत्रालय मौके के तौर पर देख रहा है। इस दौरान बाजारों में आवाजाही के लिए एक दिशा-निर्देशित योजना बनानी है। इसमें देखना होगा कि पैदल चलने के लिए ऐसा उचित मार्ग बन सके, जिस पर बाजार आने वाले लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिग कायम रखी जा सके।
योजना का शेड्यूल
मंत्रालय की तरफ से जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि 30 जून तक बाजारों की पहचान करनी है। अगले तीन महीने में बाजारों के सभी हितधारकों के साथ मिलकर योजना तैयार होनी है। इस बीच 31 जुलाई तक बाजार का बड़े स्तर पर सर्वे करना है। सितंबर के आखिर तक योजना तैयार करनी है। इसकी व्यवहारिकता का पता करने के लिए अक्तूबर के पहले हफ्ते में बाजार की अस्थायी बैरिकेडिंग, कुछ सड़कों की बंदी आदि पर परीक्षण होना है। जरूरी होने पर योजना में संशोधन किया जाएगा। इससे नवंबर में इस योजना को जमीन पर उतारा जा सकेगा।
इस तरह के होंगे इंतजाम
- बाजारों में पैदल चलने और इंतजार करने के लिए होगा इंतजाम।
- आवाजाही बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त सड़कों का निर्माण संभव।
- बनेगी ऑन-स्ट्रीट पार्किंग, बाजार होगा वाहन मुक्त जोन।
- जरूरत के हिसाब से माल ढोने के लिए अलग से बनाया जा सकता कैरिज-वे।
- साइकिल ट्रैक बनाया जाएगा। बाजार जाने वाली सड़कों के पैदल-पथ की बढ़ेगी चौड़ाई।
- नवाचार के लिए बिक्री स्थल का निर्माण।
- हरियाली कायम रखने का इंतजाम होगा।
- बिक्री की जगहों, कचरे के संग्रह और शौचालय सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा।
- योजना में चयनित बाजार क्षेत्र के आसपास के इलाकों में आम लोगों के लिए संवाद करने की जगह और कम उपयोग किए जाने वाले सार्वजनिक स्थानों को भी शामिल किया जाना चाहिए।