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दिल्ली विधानसभा की 4 अनसुनी बातें

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दिल्ली में पहली बार विधानसभा के लिए मध्यावधि चुनाव होंगे। हालांकि, विधानसभा पहली बार भंग नहीं हुई है। वर्ष 1956 में कार्यकाल पूरा होने से एक वर्ष पहले विस भंग की गई थी। जबकि विस के स्थान पर बनाई गई महानगर परिषद तीन बार भंग हुई थी।
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इस बार किसी भी दल के सरकार बनाने के लिए आगे नहीं आने पर विस भंग की गई जबकि वर्ष 1956 में कांग्रेस के आपसी टकराव के कारण ऐसा किया गया था, लेकिन मध्यावधि चुनाव नहीं कराए गए थे। केंद्र सरकार ने विधान सभा का अस्तित्व खत्म कर दिया था।

वर्ष 1967 में विधानसभा के स्थान पर महानगर परिषद की स्थापना की गई जिसे केंद्र सरकार ने वर्ष 1975, 1980 व 1990 में भंग किया। वर्ष 1993 में फिर विधानसभा की व्यवस्था कर दी गई।
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तब से लगातार चार बार कार्यालय पूरा हुआ, लेकिन पांचवीं विधानसभा में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने पर भंग करनी पड़ी, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने के 49 दिन बाद त्याग पत्र दे दिया। इसके बाद भाजपा व कांग्रेस ने सरकार बनाने से मना कर दिया। हालांकि पर्दे के पीछे से भाजपा ने सरकार बनाने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाई।

झारखंड व जम्मू-कश्मीर के बाद चुनाव!

राजनीतिक पार्टियां अपने फायदे के लिए विधानसभा चुनाव के लिए मुफीद समय देख रही हैं। भाजपा का मानना है कि झारखंड व जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद ही दिल्ली में चुनाव हों।

पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि झारखंड व जम्मू में चुनाव के बाद भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी दिल्ली में उपलब्ध होंगा। चुनावी रणनीति के साथ ही प्रचार के लिए उनके पास वक्त होगा। बड़ी रैली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित कर सकेंगे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता भी इस दौरान पूरा दमखम लगा सकेंगे।

ऐसे में जनवरी के अंतिम सप्ताह और फरवरी में चुनाव की तारीख को भाजपा फायदे का सौदा मान रही है। इस दौरान बिजली-पानी का संकट दिल्ली वालों को नहीं सताएगा। प्रचार के लिए खुशगवार मौसम भी फायदेमंद होगा।

हालांकि, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि पार्टी चुनाव के लिए तैयार है। चुनाव आयोग जब भी समय निर्धारित कर दे पार्टी कार्यकर्ता पूरे ताकत के साथ चुनावी मैदान में होंगे।

चुनाव की आहट पड़ते ही बैठकों का दौर शुरू

दिल्ली विधानसभा चुनाव की आहट होते ही बैठकों का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार को प्रदेश प्रभारी प्रभात झा की अध्यक्षता में चुनावी बैठक का आयोजन पंडित पंत मार्ग स्थित प्रदेश कार्यालय में हुआ जहां नवगठित प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को चुनाव में जुट जाने का निर्देश दिया गया।

पार्टी पदाधिकारियों को नीतिगत फैसले से अवगत कराते हुए प्रदेश प्रभारी ने कहा कि चुनाव की रणनीति समस्त विपक्ष से मुकाबले की रहेगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि दिल्ली की जनता ने विगत चुनावों में एक नए प्रयोग को चुना था।

आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता के विश्वास को तोड़ा, जनता वोट के माध्यम से उस विश्वासघात का बदला लेगी। दिल्ली की जनता अब एनजीओ कल्चर जिसके अंतर्गत मुद्दों को गर्म कर भावनाओं को भड़काकर लाभ की संभावनाएं अर्जित की जाती हैं, को बखूबी जनता समझ चुकी है। बैठक में आगामी चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति बनाने का कार्य भी शुरू कर दिया गया।

नवनियुक्त जिलाध्यक्षों से कहा गया कि वे जितना जल्दी हो सके अपनी टीम का गठन कर लें। जिलास्तर पर कार्यकारिणी और मंडल अध्यक्षों की चुनाव प्रक्रिया को अंजाम दें। इसके साथ ही सदस्यता अभियान के तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने का निर्देश दिया गया। इस मौके पर नई दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी, भाजपा के वरिष्ठ विधायक प्रो. जगदीश मुखी, कुलवंत राणा, मनोज शौकीन आदि उपस्थित थे।
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अधिसूचना होने पर बंद होगा नॉमिनेशन

राजधानी में तीन विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव लड़ने के लिए नामांकन करने की अंतिम तारीख आज (बुधवार) को है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय देव का कहना है कि दिल्ली विधानसभा भंग करने को कैबिनेट की मंजूरी बेशक मिल गई है लेकिन अधिसूचना जारी नहीं हुई तो उपचुनाव केलिए नामांकन होगा।

दिल्ली में महरौली, तुगलकाबाद और कृष्णा नगर से 2013 में चुनाव जीतने वाले विधायक परवेश साहिब सिंह वर्मा, तुगलकाबाद से रमेश बिधूड़ी और कृष्णा नगर से जीते डॉ. हर्षवर्धन सांसद का चुनाव जीते थे। इसकी वजह से खाली हुई तीनों विस सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई है। नामांकन प्रक्रिया 28 अक्तूबर से नामांकन शुरू हुआ।

शुरुआती दिनों में कोई नामांकन नही हुआ जबकि सोमवार को महरौली से एक निर्दलीय प्रत्याशी ने नामांकन दाखिल किया। अब मंगलवार को छुट्टी थी जबकि बुधवार को नामांकन की आखिरी तारीख है।

उपराज्यपाल नजीब जंग की तरफ से विधानसभा भंग करने की सिफारिश और फिर केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने के चलते राजनैतिक दलों ने इन सीटों पर प्रत्याशी चयन नहीं किया है।

ऐसे में अब यह उम्मीद नहीं है कि बुधवार को कोई नया नामांकन दाखिल होगा। लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से जब तक चुनाव रद्द करने की अधिसूचना नहीं होती, तब तक प्रक्रिया नहीं रोकी जा सकी। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मंगलवार देर रात या बुधवार सुबह विस भंग करने की अधिसूचना राष्ट्रपति की मंजूरी से जारी कर दी जाए।
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