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केजरीवाल के बनाए आयोग को केंद्र ने बताया अवैध

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दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच एक बार फिर से तलवारें खिंचने की नौबत आ गई है। डीडीसीए में हुए कथित घोटाले की जांच के लिए दिल्ली सरकार द्वारा बनाए गए गोपाल सुब्रह्मण्यम आयोग को केंद्र सरकार ने असंवैधानिक और गैर कानूनी करार दे दिया है।
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दिल्ली के एलजी नजीब जंग के माध्यम से भेजे गए अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है इसलिए, उसे इस तरह का आयोग बनाने का कानूनी अधिकार नहीं है।

केंद्र के नोटिफिकेशन पर जवाब देते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा है कि डीडीसीए में अनियमितता की जांच के लिए बनाई गई समिति की संवैधानिकता का फैसला करने का अधिकार केवल अदालत को है।
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नोटिफिकेशन पर केंद्र सरकार को घेरते हुए आप ने कहा है कि इस तरह के आदेश का मकसद दिल्ली सरकार को डराने की कोशिश मात्र है।

गोपाल ने अजित डोवाल को लिखी चिट्ठी

मालूम हो कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 21 दिसंबर को डीडीसीए में हुई अनयिमितताओं की जांच के लिए गोपाल सुब्रह्मण्यम के नेतृत्व में जांच आयोग का गठन किया था।

बता दें कि वित्त मंत्री अरूण जेटली लगभग 13 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल वित्त मंत्री अरूण जेटली पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगा चुके हैं जिसे जेटली ने कोर्ट में चुनौती भी दी है।

इस बीच गोपाल सुब्रह्मण्यम ने जांच आयोग के गठन के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल को पत्र लिख कर सीबीआई के कुछ अधिकारियों की मांग की है।

इसके साथ जांच को आगे बढ़ाने के लिए गठित होने वाले एसआईटी के लिए उन्होंने दिल्ली पुलिस और इंटैलिजेंस व्यूरों के कुछ अधिकारियों की भी मांग की है।

क्या है पूरा मामला

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपने प्रधान सचिव के दफ्तर पर छापेमारी के बाद से ही लगातार कह रहे हैं कि छापे के पीछे सीबीआई की मंशा डीडीसीए में अनियमितताओं के मामले की जांच से जुड़े दस्तावेज जब्त करने की रही है।

दिल्ली क्रिकेट संघ में वित्तीय अनियमितताओं के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली दिसम्बर 1999 से 2013 तक डीडीसीए कते अध्यक्ष रहे हैं।

गौरतलब है कि 12 नवंबर को भारत और दक्षिण अफ्रीका टेस्ट मैच की मेजबानी से पहले दिल्ली सरकार ने डीडीसीए घोटाले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय चांज कमेटी का गठन किया था।

जांच कमेटी में पीडब्लयूडी के प्रमुख सचिव चेतन बी सांघी, खेल सचिव पुन्य सलिल श्रीवास्तव और दिल्ली सरकार के वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा शामिल थे।

इसमें कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के गंभीर धोखाधड़ी और जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा की गई जांच, डीडीसीए के आंतरिक पैनल द्वारा की गई जांच और डीडीसीए पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट शामिल थी। हालांकि इस रिपोर्ट में कहीं भी जेटली का नाम नहीं आया है।
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क्या कहती है SFIO रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार 20 से ज्यादा अनियमितताएं सामने आई। जिनमें वित्तिय वर्ष 2008-09 से 2011-12 तक वित्तिय अनियमितताएं भी शामिल हैं। इस दौरान अरुण जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे।

प्रमुख बिंदु-
1- डीडीसीए की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली कमजोर है। इसकी अचल संपत्ति का ब्यौरा रिकॉर्ड में नहीं रखा गया है।
2- 20 हजार रुपए से ज्यादा के लागत के खर्चों में लेन-देने नकद किया गया है- इसमें संचालकों और सदस्यों को निदेशक मंडल या केंद्र सरकार की अनुमति के बिना भुगतान किया गया है।
3- फिरोजशाह कोटला को दोबारा बनाने में 2002 से 2007 तक 5 साल का समय लिया गया। इसके लिए शुरूआती बजट 24 करोड़ था लेकिन इसमे कुल खर्च 114 करोड़ किया गया।
4- स्टेडियम के पुर्ननिर्माण में जारी किए गए अनुबंधों का कोई पेपर रिकॉर्ड नही रखा गया।
5- एमसीडी और दिल्ली शहरी कला आयोग से बिना अनुमति के अवैध निर्माण किया गया।
6- डीडीसीए ने बिना उचित प्रक्रिया और अनुमति के कॉर्पोरेट बॉक्स का निर्माण करवाया।

SFIO रिपोर्ट के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया कि निरिक्षण के दौरान अरुण जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे और गैर कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्यकारिणी की बैठकों में निदेशक पैनल की अध्यक्षता करते रहे।
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