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वायु प्रदूषण का दुष्प्रभाव, मूत्र में मिले खतरनाक मेटल

Fri, 21 Dec 2018 01:34 AM IST
vivek shukla ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर जारी अध्ययन रिपोर्ट में इस तथ्य का खुलासा किया है कि दिल्ली में बीती दीवाली के बाद जांच को लिए गए यूरीन के नमूने में भारी और खतरनाक मेटल मिला है।

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वहीं, अन्य और एक पूर्व अध्ययन रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का घर बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी सजा बच्चों और महिलाओं को श्वसन व फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के रूप में मिल रही है।

सीपीसीबी ने सुप्रीम कोर्ट के 10 दिसंबर के आदेश का पालन करते हुए वायु प्रदूषण के कारण सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की अब तक की सभी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारी मेटल की मौजूदगी तंत्रिका तंत्र, हृदय और पाचन तंत्र की व्यवस्था को गंभीर स्तर तक नुकसान पहुंचा सकती है। दीवाली के बाद सीपीसीबी के आदेश पर वायु प्रदूषण के दुष्परिणामों को लेकर सेंटर फॉर ऑक्युपेशनल एंड एनवायरमेंटल हेल्थ (2017) की ओर से यह अध्ययन किया गया था।
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पटाखे डाल रहे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते वर्ष की दीवाली के बाद वायु प्रदूषण के कारण यूरीन में लेड, बैरियम और स्ट्रांटियम जैसे खतरनाक मेटल की पुष्टि हो रही है। वहीं, दिल्ली में दीवाली के समय पटाखों के जलाए जाने से कई लोगों पर इसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है। मसलन कई लोग दीवाली के बाद अस्पताल पहुंचे, जिनकी आंखों में लालिमा और जलन जैसी समस्याएं थीं।

लेड, स्ट्रांटियम और बैरियम जैसे भारी मेटल पटाखों में इस्तेमाल किए जाते हैं। यूरीन में इनकी मौजूदगी और इनकी मात्रा का बढ़ना इस बात की पुष्टि करता है कि लोग ऐसे तत्वों की जद में आए हों। बच्चों में ऐसे भारी तत्वों के कारण मानसिक पागलपन और मस्तिष्क संबंधी बीमारियां होती हैं। 

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दीवाली के बाद बढ़े अस्पतालों में मरीज

अध्ययन के लिए दिल्ली में पीतमपुरा, कोटला, सिरी फोर्ट और परिवेश भवन क्षेत्रों समेत 20 अस्पतालों का सर्वे किया गया था। अध्ययन में पाया गया कि दीवाली के बाद इन अस्पतालों में रोज भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। संस्था की ओर से सर्वे में श्वसन, स्किन, कान, आंख, नाक की समस्याओं से जुड़ी प्रश्नोत्तरी तैयार की गई थी। इन चार क्षेत्रों के अस्पतालों में 20 फीसदी स्ट्रोक के लक्षण और 40 फीसदी हृदय रोग संबंधी मरीज दाखिल हुए। 

दिल्ली में बच्चों का घुट रहा दम
चितरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (कोलकाता) के जरिये बंगाल और दिल्ली के स्कूली बच्चों में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली श्वसन और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों को लेकर किए गए अध्ययन में भी चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। संस्था की ओर से मार्च 2003 व अगस्त 2005 में अध्ययन किया गया था।

इसमें कुल 36 स्कूलों के 7757 छात्र और 3871 छात्राओं की सेहत पर अलग-अलग मौसम में अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली के बच्चों में 1.80 गुना ज्यादा श्वसन संबंधी (अपर रेस्पिरेटरी सिम्पटम-यूआरएस) बीमारियां है। यूआरएस में साइनस, नाक का बहना या जाम होना, जुकाम-बुखार आदि समस्याएं शामिल हैं। 
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