अध्ययन के लिए दिल्ली में पीतमपुरा, कोटला, सिरी फोर्ट और परिवेश भवन क्षेत्रों समेत 20 अस्पतालों का सर्वे किया गया था। अध्ययन में पाया गया कि दीवाली के बाद इन अस्पतालों में रोज भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। संस्था की ओर से सर्वे में श्वसन, स्किन, कान, आंख, नाक की समस्याओं से जुड़ी प्रश्नोत्तरी तैयार की गई थी। इन चार क्षेत्रों के अस्पतालों में 20 फीसदी स्ट्रोक के लक्षण और 40 फीसदी हृदय रोग संबंधी मरीज दाखिल हुए।
दिल्ली में बच्चों का घुट रहा दम
चितरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (कोलकाता) के जरिये बंगाल और दिल्ली के स्कूली बच्चों में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली श्वसन और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों को लेकर किए गए अध्ययन में भी चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। संस्था की ओर से मार्च 2003 व अगस्त 2005 में अध्ययन किया गया था।
इसमें कुल 36 स्कूलों के 7757 छात्र और 3871 छात्राओं की सेहत पर अलग-अलग मौसम में अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली के बच्चों में 1.80 गुना ज्यादा श्वसन संबंधी (अपर रेस्पिरेटरी सिम्पटम-यूआरएस) बीमारियां है। यूआरएस में साइनस, नाक का बहना या जाम होना, जुकाम-बुखार आदि समस्याएं शामिल हैं।