बहस में शामिल होते हुए परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मेट्रो फेज चार पर दिल्ली सरकार केंद्र के साथ लगातार बात कर रही थी। जीएसटी आने से दोबारा बजट का आकलन किया। फिर, सीसीटीवी और मोहल्ला क्लीनिक प्रोजेक्ट की तरह मेट्रो को भी रोकने की कोशिश हुई।
वित्त विभाग के अधिकारी फाइल अटकाते रहे। कई आपत्तियां लगाई गईं। कई रूट को नकारात्मक माना गया। कैलाश गहलोत के मुताबिक, प्रोजेक्ट की फाइल कभी भी मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने नहीं रोकी। केंद्र से भेजे अधिकारियों इसे अटकाए रखा। डीएमआसी बोर्ड से पास होने के हफ्ते भर में दिल्ली कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
उपमुख्यमंत्री ने कसा केंद्र पर तंज
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा ने शुरू से प्रोजेक्ट रोकने की कोशिश की। जहां पैसा देना होता है, वहां दिल्ली सरकार को आगे कर देते हैं, क्रेडिट लेने में केंद्र आगे रहता है। जबकि टैक्स में हिस्सेदारी भी नहीं करते। शुरू में मेट्रो फेज चार की कुल अनुमानित लागत 57000 करोड़ रुपये थी। दिल्ली सरकार की वजह से यह 11,000 करोड़ रुपये नीचे आई ।
सिसोदिया के मुताबिक, मेट्रो दिल्लीवालों का शौक नहीं, जरूरत है। विदेशों के किराए से दिल्ली में मेट्रो के किराए की तुलना नहीं की जा सकती। यहां की आमदनी भी देखनी होगी। सिसोदिया ने चेतावनी दी कि अगर किराया बढ़ाना घटाना हमारे अधिकार में आ जाए तो हम 25 फीसदी किराया कम कर सकते हैं।