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Delhi High Court: समलैंगिक विवाह मान्यता मामले की सुनवाई लाइव-स्ट्रीम करने के प्रस्ताव का केंद्र ने किया विरोध

Wed, 24 Aug 2022 08:32 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हलफनामे में कानून और न्याय मंत्रालय ने अदालत को बताया कि हाल के दिनों में ऐसे मामले सामने आए हैं जब पूरी तरह से लाइव-स्ट्रीम नहीं किए गए मामलों में भी गंभीर अशांति हुई और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीशों के खिलाफ बेबुनियाद और अनावश्यक आरोप लगाए गए।
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दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र ने दाखिल किया जवाब - फोटो : ANI-फाइल फोटो
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं में उच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही को लाइव-स्ट्रीम करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष पेश जवाब में कहा कि मामले में कार्यवाही अत्यधिक आरोपित होने की संभावना है और इसमें दोनों पक्षों के भावुक तर्क शामिल होंगे, जिससे तीखी और अवांछित प्रतिक्रिया हो सकती है।

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उच्च न्यायालय के समक्ष पेश हलफनामे में कानून और न्याय मंत्रालय ने अदालत को बताया कि हाल के दिनों में ऐसे मामले सामने आए हैं जब पूरी तरह से लाइव-स्ट्रीम नहीं किए गए मामलों में भी गंभीर अशांति हुई और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीशों के खिलाफ बेबुनियाद और अनावश्यक आरोप लगाए गए।

हलफनामे में कहा गया है यह सर्वविदित है कि न्यायाधीश वास्तव में सार्वजनिक मंचों पर अपना बचाव नहीं कर सकते हैं और उनके विचार, राय न्यायिक घोषणाओं में व्यक्त की जाती हैं। सरकार ने कहा कि ऐसी संभावना है कि इस तरह की लाइव स्ट्रीमिंग को संपादित या मॉर्फ किया जा सकता है और कार्यवाही की पूरी पवित्रता खो सकती है।

केंद्र ने दिया यह तर्क

सरकार ने कहा कि अदालत की कार्यवाही की गरिमा और गंभीरता को बनाए रखने के लिए विशेष रूप से वर्तमान जैसे मामलों में, जिनमें तीखी वैचारिक विद्वता मौजूद हो सकती है, यह सलाह दी जा सकती है कि कार्यवाही का सीधा प्रसारण न किया जाए।

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उच्च न्यायालय हिंदू विवाह अधिनियम और विशेष विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग करने मुद्दे पर सुनवाई कर रहा है। इस मामले में केंद्र ने कहा है कि कानून केवल एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह को मान्यता देता है।

इसने पहले कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग का विरोध करते हुए केंद्र ने कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का नहीं है और मामले में अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग की मांग केवल सहानुभूति हासिल करने के लिए है। हालांकि कोर्ट ने हलफनामे पर नाखुशी जाहिर की थी और सरकार से बेहतर जवाब दाखिल करने को कहा था।

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