जेएनयू हिंसा मामले में अपराध शाखा की एसआईटी को कैंपस स्थित बैंक की सीसीटीवी फुटेज मिल गई है। एसआईटी इसे बड़ी कामयाबी मान रही थी, लेकिन फुटेज से छेड़छाड़ की गई है। बैंक के सीसीटीवी कैमरों में करीब 16 घंटे कुछ नहीं दिखाई दे रहा है।
ऐसे में बैंक के अधिकारी व कर्मचारी संदेह के घेरे में आ गए हैं। दूसरी तरफ जेएनयू के सर्वर से डाटा को लोड कर लिया है, मगर वह डिस्प्ले नहीं हो रहा है। एसआईटी ने शुक्रवार को एफएसएल से सीसीटीवी फुटेज के विशेषज्ञ को बुलाया है। एसआईटी को उम्मीद है कि यह फुटेज सही सलामत मिल जाएगी।
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जेएनयू में कावेरी व गोदावरी हॉस्टल के पास एसबीआई बैंक है। इस बैंक के बाहर चार सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। अभी तक बैंक अधिकारी कर रहे थे कि बैंक के सीसीटीवी कैमरे खराब हैं।
एसआईटी ने बैंक के सर्वर से डाटा को लोड कर सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तो सीसीटीवी फुटेज मिल गई। जांच में पता लगा कि बैंक के सीसीटीवी कैमरे खराब नहीं थे। एसआईटी को जानबूझकर माना किया जा रहा था। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तो हिंसा वाले दिन के सीसीटीवी फुटेज में कुछ नहीं दिखाई दिया।
सीसीटीवी फुटेज में पांच जनवरी को दोपहर ढाई बजे से छह जनवरी सुबह छह बजे से तक कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। इसके आगे व पीछे बिल्कुल स्पष्ट दिखाई दे रहा है। ऐसे में एसआईटी मान रही है कि बैंक के सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई है। जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का मानना है कि या तो सीसीटीवी कैमरों के ऊपर स्प्रे कर दिया गया या फिर डीवीआर को बंद कर दिया गया।
जेएनयू में जब हिंसा हुई थी उस दिन रविवार होने के कारण बैंक बंद था। सवाल ये खड़ा होता है कि बैंक के सीसीटीवी फुटेज से किसने छेड़छाड़ की है। एसआईटी ने इसे लेकर जांच शुरू कर दी है।