केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को पर्चों में सेंध लगने का अंदेशा परीक्षाएं शुरू होने से पहले ही लग गया था। बोर्ड को पहले ही जानकारी मिली थी कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर बोर्ड के नाम से फर्जी आईडी (ce.cbse2018@gmail.com) से मेल की जा रही है।
इसके माध्यम से केंद्रों को वेरिफिकेशन के लिए प्रश्न पत्र की कॉपी मेल पर देने को कहा जा रहा था। इस सब जानकारी के बाद भी बोर्ड ने लापरवाही बरती और परीक्षा केंद्रों को महज अलर्ट भेजकर खानापूर्ति कर दी। बोर्ड अपने सिस्टम को फूल प्रूफ मानते हुए संतुष्ट रहा कि पेपर लीक नहीं हो सकता। पेपर लीक करने वाले सीबीएसई से भी दो कदम आगे रहे और पूरे सिस्टम को ही ध्वस्त कर दिया।
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक केके चौधरी की ओर से 4 मार्च को देश व विदेश के सभी परीक्षा केंद्रों को एक अलर्ट जारी किया गया था। ‘अमर उजाला’ को इस अलर्ट की जानकारी मिल गई थी। लिहाजा इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
अलर्ट में परीक्षा केंद्रों को आगाह किया था कि केंद्रों पर बोर्ड के नाम से फर्जी मेल से प्रश्न पत्र की कॉपी साझा करने के लिए कहा जा रहा है। सेंटरों को कहा गया था कि इस तरह के फर्जी मेल पर ध्यान न दें क्योंकि बोर्ड परीक्षा केन्द्रों से प्रश्न पत्र की कॉपियां वेरिफिकेशन के लिए नहीं मांगता है।
इस मेल को किन्हीं शरारती तत्वों की ओछी हरकत बताया गया था। सेंटरों को इस तरह के मेल का जवाब न देने व प्रश्न पत्र की प्रतियों को न भेजने की हिदायत दी गई थी। अब जानकार सवाल उठा रहे हैं कि जब इस तरह के फर्जी ईमेल का परीक्षा शुरू होने से पहले ही पता चल गया था तो बोर्ड ने सजगता क्यों नहीं बरती।
ई-मेल आईडी की पहचान होने के बावजूद उसे गंभीरता से नहीं लिया। न ही मामला दर्ज कराने की जरूरत समझी। कयास हैं कि संभवत: किसी सेंटर पर बोर्ड का अलर्ट देर से मिला हो और वहां से फर्जी ईमेल पर प्रश्न पत्र भेज दिए गए हों।