केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से अभिभावकों और बच्चों को सलाह दी गई है कि यदि स्थान बदलने के कारण वह स्कूल बदलना चाहते हैं तो 10वीं और 12वीं में स्कूल ना बदलें। बोर्ड का कहना है कि इन कक्षाओं में स्कूल बदलने से शैक्षिक वातावरण पर असर पड़ता है। बोर्ड की सलाह है कि बच्चों को स्कूल बदलना जरूरी हो तो वह नौंवीं या 11वीं कक्षा में ही बदल लें। वहीं, बोर्ड ने 10वीं व 12वीं कक्षा में दाखिले के लिए स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सीबीएसई के अनुसार, स्कूलों को दिए गए निर्देशों में कहा गया है कि आठ परिस्थितियों में इन कक्षाओं में दाखिले के लिए कुछ औपचारिकताएं हैं, जिन्हें पूरा करना जरूरी है। कक्षाओं मेें दाखिले मानक संचालन प्रक्रिया के अंतर्गत ही होंगे। बोर्ड के अनुसार, यदि अभिभावक का स्थानांतरण अन्यत्र स्थान पर हो जाए तो बच्चे के 10वीं-12वीं में दाखिले के लिए उन्हें अनुरोध पत्र, कक्षा नौवीं या 11वीं का पंजीकरण कार्ड, रिपोर्ट कार्ड, ट्रांसफर सर्टिफिकेट, स्थानांतरण आदेश की सत्यापित कॉपी व नए स्थान के संबंध में दस्तावेज देने होंगे। इसके साथ ही उन्हें एक हजार रुपये प्रोसेसिंग शुल्क भी देना होगा।
वहीं यदि परिवार नया घर खरीदता है, व्यवसाय के कारण घर बदलता है, अभिभावक के किसी नई संस्था से जुड़ने के कारण जगह में बदलाव होता है तो इसके दस्तावेज भी देने होंगे। वहीं, हॉस्टल बदलने, फेल या कंपार्टमेंट आने पर दोबारा दाखिला लेने, बेहतर शिक्षा के कारण, स्कूल से घर की दूरी, स्वास्थ्य को आधार बनाकर भी दस्तावेज के साथ दाखिला ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों को पांच हजार रुपये प्रोसेसिंग शुल्क का भुगतान करना होगा। बोर्ड ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि 10वीं और 12वीं में दाखिले 15 जुलाई के बाद नहीं होंगे। इससे पूर्व ही दाखिला प्रक्रिया पूरी कर लें।