आम आदमी पार्टी (आप) ने सीबीआई के मार्फत अमित शाह को बचाने का आरोप लगाया है। आप के मुताबिक, सीबीआई गुजरात के बहुचर्चित एनकाउंटर मामलों को कमजोर करने के लिए अदालत में हल्की दलील दे रही है। कोशिश तीस दिसंबर की सुनवाई में मामला रफा-दफा कराने की है।
मामला गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन व तुलसी प्रजापति एनकाउंटर केस व कौसर बी की हत्या से जुड़ा है। इसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आरोपी हैं।
मामला फिलहाल मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत में चल रहा है। इसी साल दिसंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में मामले में बहस हुई थी। अदालत ने शाह के मामले में अपने आदेश को तीस दिसंबर तक सुरक्षित रख लिया है।
आप नेता आशीष खेतान ने कहा कि दिसंबर के पहले पखवाड़े में शाह के वकीलों ने तीन दिन तक अपने मुवक्किल के बचाव में दलीलें दीं। वहीं सीबीआई के वकील ने सिर्फ पंद्रह मिनट में अपनी बात खत्म कर दी।
खेतान के मुताबिक, यूपीए सरकार के दौरान सीबीआई ने जांच के हर स्तर पर इस बात पर जोर दिया था कि पूरी साजिश शाह के इर्द-गिर्द रची गई।
यहां तक कि सीबीआई ने उन पर जांच में बाधा डालने, सबूत मिटाने व कथित तौर पर एक महत्वपूर्ण गवाह के अपहरण का आदेश देने का भी आरोप लगाया था। केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद सीबीआई का रुख बदल गया है।