सिख विरोधी दंगा मामले को अंजाम तक पहुंचाने में सीबीआई के वकीलों की दलीलों की अहम भूमिका रही है। सीबीआई ने जहां एक ओर दिल्ली पुलिस की कार्य शैली पर सवाल उठाया, वहीं दूसरी ओर घटना की चश्मदीद जगदीश कौर के बयान को अपने केस का आधार बनाया।
सीबीआई की ओर से जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा व डीपी सिंह ने कहा कि इस मामले को समग्र रूप से देखने की जरूरत है। यह ऐसा मामला है, जिसमें हजारों सिखों की हत्या की गई, उनकी संपत्ति को नष्ट किया गया और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया।
एजेंसी के वकीलों ने कहा इस मामले में दिल्ली छावनी थाना पुलिस ने सबसी पहली एफआईआर संख्या 416/84 दलजीत कौर की शिकायत पर दर्ज की थी। उसने दंगा करने व अपना घर जलाने, उसके पति अवतार सिंह की पिटाई के बाद हत्या का आरोप लगाया था।