कांशीराम मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हरीश चंद्रा की आत्महत्या के मामले की जांच स्थानीय पुलिस और चिकित्सा विभाग ने शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई किसी भी दिन जांच के लिए उनके मेडिकल कॉलेज स्थित घर आ सकती है।
इसके अलावा 10 हजार करोड़ रुपये के एनआरएचएम घोटाले में नाम होने की वजह से लखनऊ से भी एक टीम जल्द ग्रेनो आएगी। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने इस बारे में जानकारी होने से इंकार किया है।
वहीं, कांशीराम मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड मशीन को लेकर हुआ विवाद की भी अब जांच के घेरे में आ गया है। इसकी जिलास्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना ही आया है।
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हरीश चंद्रा की मौत के बाद एक बार फिर एनआरएचएम घोटाला सुर्खियों में आ गया है। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई की सख्ती के कारण और मेडिकल कॉलेज में हुए मशीन घोटाले को लेकर हरीश चंद्रा मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। डॉ. चंद्रा से पहले भी एनआरएचएम से जुड़े छह लोगों को मौत हो चुकी है।
मीडिया को क्यों नहीं दिखाया सुसाइड नोट
आम तौर पर आत्महत्या के मामले में सुसाइड नोट मिलने पर पुलिस महकमा पारदर्शिता के लिए ये नोट मीडिया के सामने रखता है। लेकिन, डॉक्टर आत्महत्या मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
पुलिस ने मौके पर मिले सुसाइड नोट को मीडिया के सामने लाना तो दूर.. उसे काफी दूर रखा गया। इसके अलावा घटना के बाद मीडिया को घटनास्थल (कमरे में) तक में नहीं घुसने दिया गया।