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सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई की अपील, सज्जन कुमार को दी जमानत तो निष्पक्ष जांच होगी प्रभावित

Fri, 15 Mar 2019 01:16 PM IST
पूजा त्रिपाठी भाषा, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में उम्र कैद की सजा पाये कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार की अपील खारिज की जाये। सज्जन कुमार ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दे रखी है।

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न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष सीबीआई ने सज्जन कुमार की जमानत का भी विरोध किया और तर्क दिया कि उन्हें जमानत पर रिहा किया गया तो इस नेता के खिलाफ लंबित अन्य मामलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से सुनवाई नहीं हो सकेगी।

शीर्ष अदालत में सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर अपने जवाब में सीबीआई ने कहा है कि उनका काफी राजनीतिक रसूख है और वह अपने खिलाफ लंबित मामलों मे गवाहों को प्रभावित और आतंकित करने में सक्षम हैं। 
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जांच ब्यूरो ने यह भी कहा कि सज्जन कुमार के राजनीतिक प्रभाव ने स्वतंत्र जांच को बाधित किया और 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ित के लिये न्याय प्रक्रिया को पटरी से ही उतार दिया था।

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याचिका 25 मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दी

पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद सज्जन कुमार की याचिका 25 मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दी। उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर, 2018 को सज्जन कुमार को दक्षिण पश्चिम दिल्ली में छावनी के राजनगर पार्ट-1 में 1 और 2 नवंबर, 1984 को पांच सिखों की हत्या के मामले में बरी करने के निचली अदालत के 2010 के निर्णय को निरस्त करते हुए कांग्रेस के इस पूर्व सांसद को दोषी ठहराया और उन्हें ताउम्र कैद की सजा सुनाई। इस मामले में अदालत ने पांच अन्य मुजरिमों को भी दोषी ठहराने और अलग अलग अवधि की सजा देने का फैसला बरकरार रखा था।

तत्कालीन प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी की 31 अक्टूबर, 1984 को उनके दो सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किये जाने के बाद सिख विरोधी दंगे भड़के थे। इन दंगों के दौरान दंगाइयों ने 2700 से अधिक सिखों की राष्ट्रीय राजधानी में हत्या कर दी थी।
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