लोगों को घर भेजने के लिए रेलवे ने गाड़ियां तो चला दी हैं लेकिन लोगों की मुसीबतें अब भी कम नहीं हुई हैं। किसी को कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा तो किसी को गाड़ी रद्द हो जाने के बाद पैसे वापस नहीं मिल पा रहे। लाइनें लंबी हैं और काउंटर पर कैश की किल्लत है।
जिन लोगों ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाह डेरा जमा रखा है उनमें कुछ ऐसे भी हैं जिनके पास टिकट तो है लेकिन यात्रा की तिथि अभी दूर है। अब चूंकि उनके पास रहने के लिए राजधानी में अपनी छत नहीं है इसलिए स्टेशन के बाहर रहने के अलावा उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं है।
मंगोलपुरी में किराए पर रहने वाले विजय विश्वकर्मा की कहानी ऐसी ही है। वे कहते हैं कि मकान मालिक ने किराया न देने पर निकाल दिया है। टिकट 2 जून की है और प्रतापगढ़ जाना है। रहने का कोई और ठिकाना है नहीं। अब कहां जाएं। इसलिए यहीं जमे हुए हैं। विजय के साथ उनकी पत्नी भी हैं।
उत्तर रेलवे के मुख्य प्रवक्ता दीपक कुमार का कहना है कि जून में भीड़ कम हो जाएगी। अगले महीने जब 100 गाड़ियां चलने लगेंगी तो लोगों को कन्फर्म टिकट भी मिलने लगेगा।
रेलवे के प्रवक्ता ने यह स्वीकार किया कि काउंटर पर कैश की किल्लत है। उनका कहना है कि यह किल्लत जल्द ही दूर हो जाएगी। कुमार का कहना है कि यह समस्या कुछ ही काउंटर पर है।