आरोपी अभिषेक ने बताया कि वह वेदप्रकाश व उसके परिवार को अच्छी तरह जानता था। उसका दोस्त रितेश कटियार वेदप्रकाश की मजनू का टीला स्थित दुकान पर काम करता था। वेदप्रकाश ने अपना दूसरा व्यवसाय खोल लिया और दुकान रितेश को किराये पर दे दी। रितेश का व्यवसाय नहीं चला और उसे घाटा हो गया। ऐसे में रितेश ने अभिषेक की गारंटी पर वेदप्रकाश से अगस्त, 2015 में 4 लाख का लोन लिया। ब्याज के साथ साढ़े 8 लाख लौटाने थे।
रितेश लोन नहीं लौटा पा रहा था। ऐसे में वेदप्रकाश ने पैसे वापस देने के लिए दोनों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अभिषेक ने ये परेशानी अपने दोस्त व वेदप्रकाश के भतीजे सोनू
को बताई। सोनू चाचा के व्यवसाय व प्रॉपर्टी पर कब्जा करना चाहता था। दोनों ने वेदप्रकाश व उसके परिवार के हत्या की साजिश रच ली। इस साजिश में मनोज उर्फ मन्नू उर्फ बाबला (उस समय 16 वर्ष) को भी शामिल किया।
ऐसे किया पूरे परिवार को खत्म
अभिषेक एक पिस्टल लेकर आया। उस समय वेदप्रकाश का बेटा अभिषेक से कार चलाना सीख रहा था। 15 जुलाई, 2016 को सुबह 11 बजे अभिषेक ने वेदप्रकाश को ये कहकर बुलाया कि बेटे शुभम की कार का टायर बदलवाना है। जैसे ही वेदप्रकाश कार में बैठा, तो मन्नू ने क्लच वायर से वेदप्रकाश का गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद वेदप्रकाश के शव को डिक्की में डाल लिया। इनको लगा कि शुभम ने उनको वेदप्रकाश के साथ देख लिया है, तो आरोपियों ने दोपहर दो बजे शुभम को बुलाया। जैसे ही वह कार में बैठा, तो क्लच वायर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। शव को डिक्की में डाल दिया। इस तरह वेदप्रकाश की पत्नी साधना की भी हत्या कर दी थी। इसके बाद बेटी नैना को बुलाया और उसकी भी इसी तरीके से हत्या कर दी। रात को कार को घर के पास पार्क कर दिया था। शव कार की डिक्की में थे।
शव को हापुड़ में नहर में फेंका
आरोपी 16 व 17 जुलाई की रात सभी शवों को नैना की कार से हापुड़ ले गए। वहां शवों को अपर गंगा कैनाल में फेंक दिया था। यूपी पुलिस को नैना का शव मिल गया था।