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खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों ठगे

Fri, 25 Sep 2015 11:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 250 लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। गिरोह का मुखिया पकड़ा गया है। जबकि उसके दो साथी अभी भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। पुलिस के मुताबिक गिरोह के लोग ज्यादातर दक्षिण भारत में रहने वाले बेरोजगारों को टारगेट बनाते थे। ताकि रुपये डूबने के बाद पीड़ित पैसे मांगने और पुलिस से शिकायत करने नोएडा नहीं आए।
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एएसपी विजय ढुल ने बताया कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने की शिकायत पर पुलिस ने हरौला के एक मकान में छापा मारा। जहां क्विक आईटी सॉल्यूशंस नाम से कॉल सेंटर चलाया जा रहा था। मौके से एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया। यह कॉल सेंटर में कॉलिंग करने का काम करते थे। पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, क्योंकि फर्जीवाड़े में उनका कोई हाथ नहीं था।

पुलिस ने सेक्टर-12 निवासी कंपनी के निदेशक सुल्तानपुर निवासी रवित कुमार को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया जबकि उसके साथी जिशान और सन्नवर अली उर्फ  रीत फरार हो गया।
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जॉब पोर्टल से खरीदते थे डाटा

गिरोह बड़ी जॉब पोर्टल से प्रत्येक माह तीन हजार से ज्यादा लोगों का डाटा खरीदते थे। इनमें औसतन 250 से 300 लोगों को खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने का लोगों को झांसा देते थे। विदेश में नौकरी लगवाने का दावा कर रजिस्ट्रेशन व वेरिफिकेशन के नाम पर 40 से 70 हजार रुपये ट्रांसफर करने को कहते थे। रुपये मिलने के बाद और रुपयों की मांग की जाती थी। ठगी करने वाले लगातार तब तक रकम की डिमांड करते थे जब तक वह पैसे देने को मना नहीं कर देता था। इन लोगों ने 4 माह के भीतर अपना दो बार ऑफिस बदल लिया। पहले इनका ऑफिस सेक्टर-10 में था उसके बाद इन्होंने हरौला में ऑफिस खोल लिया।

शिकायत करने आया था, करनी पड़ी गाड़ियों की सफाई
गिरोह के चंगुल में फंसा तेलंगाना निवासी एम प्रसाद को दुबई में नौकरी का झांसा दिया गया था। उससे नौकरी दिलाने के नाम पर 65 हजार रुपये वसूले गए थे। जिसकी शिकायत करने वह नोएडा चला आया। उसने यहां पर सेक्टर-20 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिस आधार पर पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश किया। मगर करीब दस दिनों तक एम प्रसाद ने यहां अपना गुजर-बसर गाड़ियों की साफ-सफाई करके की। उससे जो भी पैसे उसने कमाए उससे वह यहां खाने और ठहरने और अपने केस की पैरवी में खर्च कर दिए।
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