एक्सप्रेसवे पर ओवर स्पीड गाड़ी को कैमरे में कैद कर ट्रैफिक पुलिस ने नंबर प्लेट के सहारे गाड़ी मालिक का पता कर चालान घर भेजा, लेकिन जब मालिक ने बताया कि इस नंबर की गाड़ी उसकी नहीं है तो ट्रैफिक पुलिस सकते में आ गई।
जांच के बाद मामला फर्जी नंबर प्लेट का निकला। जुलाई में दिल्ली निवासी अतुल सिंह (बदला हुआ नाम) के घर नोएडा ट्रैफिक पुलिस का ओवर स्पीडिंग का चालान पहुंचा।
वह सरकारी नौकरी करते हैं। जिस तिथि का चालान था, उस दिन वह दिल्ली में ही थे और उनकी गाड़ी गैरेज में खड़ी थी।
बाद में पता चला फर्जी थी नंबर प्लेट
ट्रैफिक पुलिस की ओर से भेजी गई फोटो देखते ही मामला सामने आ गया। उन्होंने बताया कि उनके पास डिजायर है, जबकि फोटो में रिट्ज दिख रही थी।
बाद में मामला फर्जी नंबर प्लेट का निकला। इसी तरह से दिल्ली और गुड़गांव का भी एक-एक मामला सामने आया। इसमें भी गाड़ी मालिकों ने ट्रैफिक पुलिस को बताया कि जिस गाड़ी का चालान हुआ है, असल में वह गाड़ी उस दिन एक्सप्रेसवे पर गई ही नहीं थी।
उन्होंने पुलिस को वहां नहीं होने का सबूत दिया। इसके बाद उनका चालान कैंसल कर दिया गया।
फर्जी नंबर प्लेट लगी गाड़ी को पकड़ना मुश्किल
ट्रैफिक पुलिस की मानें तो आईटीएमएस (इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से फर्जी नंबर प्लेट लगी गाड़ी को पकड़ना मुश्किल है। गाड़ी रोकने के बाद कागजों की जांच में ही फर्जी नंबर को पकड़ा जा सकता है।
अगर किसी नंबर के फर्जी होने का मामला पहले से सामने आ जाता है तो उस पर निगरानी की जा सकती है। एक्सप्रेसवे पर फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों की कई घटनाएं सामने आने के बाद यह भी संभावना जताई जा रही है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कोई गिरोह सक्रिय है।
खास बात यह कि फर्जी नंबर नोएडा-ग्रेटर नोएडा का न होकर दिल्ली, गुड़गांव या फरीदाबाद का निकल रहा है।