ग्रेटर नोएडा में तीन बदमाशों ने सोमवार रात को लिफ्ट के बहाने कोंडली क्षेत्र में कार चालक के हाथ पर चाकू मारकर स्विफ्ट डिजायर कार लूट ली।
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पीड़ित की गाड़ी में लगे जीपीएस से इंजन को लॉक कर दिया गया, जिससे गाड़ी रास्ते में रुक गई। इसके बाद पुलिस ने 20 घंटे में लोकेशन ट्रेस कर बदायूं में दो बदमाशों को पकड़कर कार बरामद कर ली।
ग्रेटर नोएडा के अल्फा-2 निवासी अनिल चौधरी नोएडा के सेक्टर-11 स्थित निजी कंपनी के अकाउंट विभाग में काम करते हैं। सोमवार रात करीब 9:30 बजे वह दफ्तर से निकलकर घर की ओर जा रहे थे।
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सेक्टर-37 के पास तीन युवकों ने उनसे परी चौक तक के लिए लिफ्ट मांगी। अनिल ने तीनों को लिफ्ट दे दी। रात करीब 10 बजे बदमाशों ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर कोंडली गांव के पास उतरने की बात कही।
लूट के बाद बीच रास्ते में बंद की गाड़ी
जब पीड़ित ने कार रोकी तो बदमाशों ने उसकी गर्दन पर चाकू रखकर कार लूट का प्रयास किया। विरोध करने पर बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। इससे अनिल की हथेलियों में चाकू लग गया।
इसके बाद बदमाश कार लूटकर भाग गए। राहगीर की मदद से पीड़ित ने पुलिस और रिश्तेदारों को घटना की जानकारी दी। अनिल की गाड़ी में जीपीएस लगा हुआ था।
पुलिस ने जीपीएस के माध्यम से बदायूं पास अलापुर में गाड़ी को ट्रेस कर लिया और उसमें लगे फ्यूल नॉड को कंट्रोल कर इंजन में ईंधन जाने से रोक दिया।
वहीं, रास्ते में एक और व्यक्ति बदमाशों के साथ आ गया था। इंजन बंद होने से बीच रास्ते में गाड़ी रुक गई, जिस कारण दो बदमाश उसी में बैठकर आराम करने लगे जबकि बाकी दोनों कहीं निकल गए।
4000 से 30 हजार तक में लगता है सिस्टम
मंगलवार को पुलिस ने इनमें से दो बदमाशों को पकड़ लिया और कार बरामद कर ली। एसपी देहात संजय कुमार सिंह का कहना है कि नॉलेज पार्क-2 थाने में मामला दर्ज किया जा रहा है। पुलिस बाकी बदमाशों की तलाश कर रही है।
वहीं, बदायूं पुलिस के अनुसार, पकडे़ गए बदमाशों ने अपना नाम धर्मेंद्र निवासी लबारी, थाना हजरतपुर, बदायूं और शौकीन निवासी सूरजपुर, नोएडा बताया है।
इस गिरोह में एक महिला सदस्य भी है, जिसका नाम माया है। वह गांव जोबर, नोएडा की रहने वाली है। उनका चौथा साथी सुनील भी जोबर में रहता है। धर्मेंद्र और शौकीन ने बताया कि बदायूं के उझानी पहुंचते ही माया और सुनील बस से नोएडा चले गए।
गाड़ियों में लगने वाले जीपीएस सिस्टम चार हजार रुपये से शुरू होकर 30 हजार रुपये तक में आते हैं। इनमें सस्ते वाले सिस्टम केवल आपको गाड़ी की लोकेशन उपलब्ध करा सकते हैं।
वहीं, 15 हजार से अधिक कीमत वाले सिस्टम में सेंसर पर कंट्रोल करने जैसी सुविधा होती है, जिससे गाड़ी बंद की जा सकती है।
कई नामी कंपनियों ने आधुनिक जीपीएस सिस्टम ईजाद किया है। गाड़ी में जीपीएस और चाबी के पास इगनिशन में चिप लगी होती है। अगर आपकी गाड़ी चोरी हो जाती है तो कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए यूजर नंबर से जीपीएस सिस्टम के जरिये इंजन को लॉक किया जा सकता है।
जैसे ही यूजर नंबर प्रयोग होगा, जीपीएस सिस्टम तुरंत कार को स्टार्ट करने वाले करंट (पावर) को रोक देगा। ऐसी स्थिति में गाड़ी स्टार्ट ही नहीं होगी। जीपीएस द्वारा इंजन को बंद किए जाने के बाद गाड़ी वहीं पर खड़ी हो जाएगी। यह काम गाड़ी मालिक के अलावा जीपीएस बनाने वाली कंपनी भी कर सकती है। पुलिस जीपीएस के जरिये गाड़ी की लोकेशन आसानी से पता कर लेती है। - संदीप नागर, ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट
आजकल हैचबैक और उसके ऊपर महंगे वाहनों में लगने वाले जीपीएस में खासियत होती है कि उन्हें सेंसर से अटैच कर दिया जाता है। गाड़ी खरीदने वाले व्यक्ति के पास इससे जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। यदि गाड़ी चोरी होती है तो जीपीएस उस गाड़ी की लोकेशन ट्रेस कर देता है। साथ ही इस सिस्टम से जुड़ी गाड़ी को नेविगेशन सिस्टम की मदद से सेंसर ब्लॉक कर दिया जाता है। इससे गाड़ी का इग्निशन और उसके फ्यूल कंजप्शन को बंद किया जा सकता है। - रवि, ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट