पूर्वी जिला पुलिस के एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (एएटीएस) ने वाहन चोरों के ऐसे हाई प्रोफाइल गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो दिल्ली-एनसीआर में वाहन चोरी करा इन्हें लेने के लिए मणिपुर से हवाई जहाज से आते थे। पुलिस ने गिरोह के बदमाश मोहम्मद आजिश खान (28) को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर 11 हाईएंड लग्जरी कारें बरामद की हैं।
पुलिस की मानें तो बरामद कारों की कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक है। आजिश के मुताबिक, गिरोह का सरगना मॉडल और कलर के अनुसार महंगी गाड़ियां चोरी कराता है। इन्हें सड़क के रास्ते उत्तर-पूर्वी राज्यों में ले जाया जाता था। इससे पहले रास्ते में हापुड़ और मुरादाबाद में कारों के इंजन और चेसिस नंबर बदल दिए जाते थे। ये पिछले कुछ दिन में 100 से अधिक कारें मणिपुर और नगालैंड पहुंचा चुके हैं।
पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह ने बताया कि उनकी टीम को वाहन चोरी कर उत्तर-पूर्वी राज्यों में पहुंचाने की सूचना मिली थी। 12 अक्तूबर को एएसआई अनिल कुमार को सूचना मिली कि मणिपुर निवासी आजिश खान चोरी की गाड़ी लेने आया है। उसके पास चोरी की एक वर्ना कार है। पुलिस ने गाजीपुर मुर्गा मंडी के पास से आजिश को दबोचकर कार बरामद कर ली। यह पंजाबी बाग इलाके से चोरी हुई थी।
पूछताछ में उसने बताया कि उसके साथ मेहताब, एलेक्स और अन्य बदमाश इंफाल से सीधे फ्लाइट पकड़कर दिल्ली आते हैं। गाड़ी लेने के बाद हापुड़ या मुरादाबाद ले जाकर उनका इंजन व चेसिस नंबर बदलकर मणिपुर पहुंचा देते थे। सरगना मणिपुर निवासी जुमा खान है। वह हर महीने दिल्ली-एनसीआर से 10 से 15 कारें चोरी कराता है।
इसके बाद ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की मदद से इन कारों के पेपर तैयार कर लोगों को ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। पुलिस ने आजिश की निशानदेही पर मणिपुर के नक्सल प्रभावित इलाके से 10 गाड़ियां और बरामद कीं। इनमें आठ क्रेटा, एक फॉरच्यूनर और एक आई-20 हैं। बरामद सभी गाड़ियां ऑटोमेटिक हैं।
जोखिम भरा था गाड़ियों को लाना
आजिश ने बताया था कि जुमा खान कारें मंगवाने के बाद इन्हें इंफाल वेस्ट की ओपिन पार्किंग, सरकारी अस्पताल, बिशनुपुर, मणिपुर की पार्किंग में खड़ी कराता है। आजिश की निशानदेही पर कारें बरामद करने के लिए एसीपी राकेश दीक्षित, इंस्पेक्टर दिनेश आर्य, एसआई रणबीर सिंह नागर व अन्य की टीम मणिपुर गई। स्थानीय पुलिस की मदद से अलग-अलग जगह पार्किंग में खड़ी 10 कारें बरामद की गईं। नक्सल प्रभावित इलाकों से इन्हें लाना खासा जोखिम भरा था। पुलिस अधिकारी करीब 200 किलोमीटर इन्हें चलाकर दीमापुर तक ले गए। वहां से इनको बड़े ट्रकों में लादकर दिल्ली लाया गया।
एसयूवी ऑटोमेटिक कारों पर था निशाना
आजिश ने पुलिस को बताया कि बदमाश दिल्ली-एनसीआर में बैठे चोरों को कार का रंग और मॉडल बता देते थे। चोरों को हिदायत थी कि वे ऑटोमैटिक कारें ही चोरी करें। कार चोरी की सूचना मिलते ही अगले दिन हवाई जहाज से मणिपुर से कार लेने एक बदमाश आ जाता था। मणिपुर व दूसरे उत्तर-पूर्वी राज्यों के ट्रांसपोर्ट विभाग की मदद से इन कारों के पेपर तैयार कर लिये जाते थे। पुलिस इनकी ट्रांसपोर्ट विभाग कर्मियों से मिलीभगत की भी जांच कर रही है।