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दो आईपीएस अधिकारियों की रार में फ्लॉप रहा कार फ्री-डे

Tue, 29 Sep 2015 06:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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दो आईपीएस अधिकारियों की रार ने मंगलवार को कार फ्री डे की सफलता पर पानी फेर दिया। जिस उद्देश्य से इसका आयोजन किया गया था, वह परवान नहीं चढ़ सका। कार फ्री-डे के दिन भी सड़कों पर कारों की अच्छी खासी संख्या रही।
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अगर पिछले अभियान से तुलना की जाए तो यह उसकी बराबरी करता भी नजर नहीं आ रहा था। कारों के बीच साइकिल चलाने वाले काफी पशोपेश में नजर आ रहे थे।

पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क और संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) भारती अरोड़ा के बीच की तनातनी ने अभियान पर काफी नकारात्मक प्रभाव डाला।

शंकर चौक के पास कतार में खड़ी साइकिलें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का इंतजार कर रही थीं मगर सुबह 10:00 बजे तक कोई पहुंचा नहीं। सिर्फ कॉरपोरेट सेक्टर वाले ही कार फ्री डे के वाहक बने रहे।

यह अभियान कितना सफल हुआ इसका अंदाजा सड़कों पर कारों की भरमार को देखकर ही लगाया जा सकता है। ऐसा लग रहा था कि लोग बे-कार आना पसंद नहीं करते। हालांकि पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क ने दावा किया है कि दूसरा कार फ्री डे काफी सफल रहा।
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कहीं पर भी वाहनों का जाम नहीं लगा। कार फ्री डे को लेकर गुड़गांव पुलिस, राहगीरी फाउंडेशन और कॉरपोरेट सेक्टर की ओर से सोमवार को जागरूकता अभियान चलाया गया था।

इसके बावजूद लोगों की इसमें खास रुचि नहीं दिखाई दी। पीक आवर में गोल्फ कोर्स रोड, साइबर हब, हुडा सिटी सेंटर रोड और उद्योग विहार की सड़कों पर कारों का भारी दबाव रहा।

अधिकारियों ने की मेट्रो की सवारी...
मेट्रो की सवारी के प्रति लोगाें को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासनिक और कॉरपोरेट अधिकारियों ने मेट्रो में यात्रा की। पुलिस कमिश्नर विर्क, संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) भारती अरोड़ा और रैपिड मेट्रो के सीईओ राजीव बंगा सहित अन्य अधिकारियों ने भी मेट्रो से यात्रा की।

सुबह यह सभी अधिकारी कार फ्री डे को सफल बनाने के लिए डीएमआरसी के हुडा सिटी सेेंटर पहुंचे। यहां से मेट्रो में सवार हो सभी सिकंदरपुर रवाना हुआ। वहां से रैपिड मेट्रो की सवारी करके सभी साइबर सिटी पहुंचे।

ट्रैफिक संभालना हो रहा था मुश्किल...
कार फ्री डे-2 पर ट्रैफिक को संभालना काफी मुश्किल हो रहा था। ट्रैफिक पुलिस और आरएसओ की टीम को शंकर चौक पर काफी मशक्कत करनी पड़ी।

यहां कारों के दबाव को देखते हुए कई लोगों ने साइकिल चलाने के विचार को त्याग दिया। आरएसओ अश्वनी शर्मा और जगदीश बवेजा ने बताया कि रोजाना की अपेक्षा कारों की संख्या यहां फिर भी कम नजर आई।

एंबार्क इंडिया के अमित भट्ट ने बताया कि साइकिल चलाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। साथ ही साइकिल सवारों के लिए सुरक्षित लेन की भी व्यवस्था करनी होगी।
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