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10 दिनों में नहीं बन सकती फीस रेगुलेशन कमिटी : डीपीएस सोसाइटी

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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) सोसाइटी ने कहा कि स्कूल-लेवल फीस रेगुलेशन कमिटी (एसएलएफआरसी) का गठन एक बड़ा कार्य है। इसे एक अप्रैल से शुरू हो रहे आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए मात्र 10 दिनों में पूरा नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की बेंच बुधवार को कई स्कूल एसोसिएशंस की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली सरकार की 1 फरवरी की अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इस अधिसूचना में स्कूलों को 10 दिनों के अंदर एसएलएफआरसी गठित करने का निर्देश दिया गया था।
एसएलएफआरसी में लॉटरी से होना है पांच अभिभावकों का चयन

डीपीएस सोसाइटी के अधिवक्ता ने स्टे की मांग करते हुए कहा कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट के अनुसार, एसएलएफआरसी में पांच अभिभावकों का चयन स्कूल परिसर में सार्वजनिक लॉटरी (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) के माध्यम से किया जाना है, जिसमें उचित नोटिस के बाद प्रक्रिया पूरी होती है। इसे जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता।
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दिल्ली सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि स्कूलों को 1 अप्रैल से अनियमित फीस नहीं वसूलने दी जाएगी, जब तक नई फीस रेगुलेशन कानून के तहत कमिटी द्वारा फीस निर्धारित और अनुमोदित न हो। कोर्ट ने मामले की आगे सुनवाई के लिए तारीख तय की है और अंतरिम राहत पर विचार कर रही है।
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