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देर रात तक चुनावी सभा कर फंस रहे प्रत्याशी

Mon, 31 Mar 2014 03:46 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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देर रात तक चुनावी सभाओं में शामिल रहने का खामियाजा प्रत्याशियों को भुगतना पड़ रहा है। इनके खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की धारा 188 के तहत अभियोग दर्ज किया जा रहा है।
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चुनाव आयोग ने रात में दस बजे के बाद चुनावी सभाओं के आयोजन पर रोक रखी है। दरअसल प्रत्याशियों का इरादा आचार संहिता के उल्लंघन का नहीं होता, ज्यादा कार्यक्रम व लोगों की भाषणबाजी बढ़ जाने से टाइम लाइन का उल्लंघन हो जाता है।

मुकल उपाध्याय, शाजिया इल्मी और राजबब्बर पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हो चुका है। बुलंदशहर, हापुड़ और बुलंदशहर सहित ज्यादातर प्रत्याशियों के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन के मामले दर्ज हुए हैं।
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इतनी बड़ी संख्या में आचार संहिता उल्लंघन के मामले पहली बार रजिस्टर्ड हो रहे हैं। इसका कारण चुनाव आयोग की सजग निगरानी है।

खास बात यह है कि आचार संहिता का उल्लंघन देर रात तक या निर्धारित समय से बाद तक सभाओं को करने के कारण हुआ है।

प्रत्याशी रोजाना ज्यादा से ज्यादा सभाओं का आयोजन करना चाहते हैं। ऐसे में कई सभाओं के लिए बिल्कुल सटीक टाइम की अनुमति ली जाती है।

प्रत्याशी चाहते हैं कि लोगों से मिलकर जल्दी से अगली सभा के लिए निकलें। जबकि चुनावी दौर में जनता ज्यादा समय प्रत्याशी को रोकना चाहती है। देरी से सभाओं में पहुंचने वाले नेताओं की सभा समस पर पूरा होना संभव नहीं होती।

ऐसे में आचार संहिता के उल्लंघन की मंशा नेता और जनता किसी की नहीं होती है। देरी से आने और देर तक सभा करने की आदत से जनता और नेता दोनों मजबूर हैं।

समर्थकों को संतुष्ट करने के प्रयास में आचार संहिता का डंडा चल रहा है। अब प्रत्याशियों के टाइम मैनेजरों ने आयोजकों को पहले ही बताना शुरू कर दिया है कि सभा के स्वीकृत टाइम के बाद नेताजी नहीं रुकेंगे।

आचार संहिता की मजबूरी है, नेताजी का आना और टाइम से निकलना दोनों जरूरी है। बावजूद इसके आए दिन किसी न किसी प्रत्याशी पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हो रहा है।
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