कोरोना संक्रमण का खतरा उन लोगों के लिए ज्यादा बताया जाता रहा है, जो दूसरी बीमारियों से पीड़ित रहे हैं। इनमें शुगर और हृदय रोगियों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए खास हिदायतें दी गई थीं। ग्रेटर नोएडा स्थित आईटीबीपी रेफरल अस्पताल में कैंसर, टीबी व हृदय रोगियों ने कोरोना को मात दी है। यहां पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों सहित 1150 मरीज ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं। इनमें केंद्रीय गृह मंत्रालय, सीबीआई, आईबी, एनआईए, एसएसबी, एनएसजी और एसपीजी सहित दूसरे सुरक्षा बलों के कर्मी शामिल रहे हैं।
आईटीबीपी के मुताबिक ग्रेटर नॉएडा में स्थित 200 बेड वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के रेफरल अस्पताल ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों और उनके परिवारों के उपचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लखनावाली कैंप, सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा में विशिष्ट सुविधाओं से लैस यह अस्पताल अपनी तरह के एक अद्वितीय सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से कम नहीं है।
अस्पताल की विशेषज्ञताओं के बारे में बताते हुए आईजी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर दिनेश चंद्र डिमरी ने कहा कि आईटीबीपी के डीजी एसएस देसवाल के व्यक्तिगत प्रयासों और लगातार मार्गदर्शन से यह उपलब्धि आईटीबीपी रेफरल अस्पताल को प्राप्त हुई है। कोरोना संक्रमण के दौरान विभिन्न बलों के बहुत सारे कर्मी इस बीमारी से संक्रमित हो गए थे।
चूंकि दूसरे सरकारी अस्पतालों में जगह मिलना आसान नहीं था, इसलिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इस अस्पताल को कोरोना के इलाज के लिए तैयार कर दिया। सभी बलों के प्रमुखों से अनुरोध किया गया कि वे अपने कोविड पॉजिटिव कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य देखभाल के लिए इस अस्पताल में भेजें।
बल के सेवानिवृत्त जवानों को विशेष देखभाल के लिए भर्ती किया गया था। अस्पताल में 8 सितंबर, 2020 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और केंद्रीय पुलिस संगठनों (सीपीओ) बिरादरी के 1150 से अधिक कोरोना पॉजिटिव रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज कर उनको घर भेजा गया।
इनमें बीएसएफ के 91 जवान, सीआरपीएफ के 196, सीआईएसएफ के 200, आईटीबीपी के 289, एसएसबी के 159, एनएसजी के 83, एसपीजी के 64, एनआईए के 15, एनडीआरएफ के 10, बीपीआर एंड डी के 01, आईबी के 19, सीबीआई के 03, एनटीआरओ के 07 एवं गृह मंत्रालय के 05 कार्मिक शामिल हैं।
यह डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और नर्सों की समर्पित टीमों के कारण ही संभव हो सका है। इन टीमों ने चौबीसों घंटे काम कर सभी रोगियों की अत्यंत सावधानी व सुरक्षा से देखभाल की। कोई भी डॉक्टर या अस्पताल का कर्मचारी अपने कर्तव्य के दौरान लंबे समय तक बीमारी के संपर्क में रहने के बावजूद कोविड संक्रमित नहीं हुआ। अस्पताल कोविड पॉजिटिव सीएपीएफ के कर्मियों और उनके परिवारों का उपचार नि:शुल्क मुहैया करवा रहा है।