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डॉक्टरों का कमाल: कैंसर मरीज को 3डी तकनीक से मिली जबड़े की हड्डी, चेहरे को ठीक करने में लगे आठ घंटे

Wed, 19 Feb 2020 07:29 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जबड़ा दिखाते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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कैंसर के मरीज को फिर से पहले जैसा सामान्य जीवन बिताना अब और भी ज्यादा आसान है। आमतौर पर मुंह के कैंसर में ऑपरेशन और रेडियोथैरेपी के बाद अक्सर मरीज को विकृत चेहरे के साथ जीवन बिताना पड़ता है, लेकिन चिकित्सीय विज्ञान में कई वर्षों पहले आई 3डी तकनीक ने इसे बदल दिया है। दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने कैंसर के मरीज को इस तकनीक की सहायता से पहली बार जबड़े की हड्डी दी है। करीब आठ घंटे तक चले इस ऑपरेशन में डॉक्टरों के आगे सबसे बड़ी चुनौती चेहरे की नसों को सुरक्षित रखना था। साथ ही जबड़े की हड्डी के उस जोड़ को भी बनाना था, जिसकी मदद से इंसान खानपान ठीक तरह से कर सकता है। 

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फरीदाबाद निवासी 30 वर्षीय प्रभजीत बताते हैं कि जब वे सात वर्ष के थे तब उन्हें सिस्टेमेटिक ल्युपस एरिथेमेटॉसिस (एसएलई) नामक क्रोनिक रोग हुआ था। इससे उन्हें मुंह का कैंसर हुआ। वर्ष 2013 में उन्होंने ऑपरेशन और रेडियोथैरेपी कराई थी, लेकिन इसके बाद उनका दैनिक जीवन बदल चुका था। ऑपरेशन के बाद उनके मैंडिबल के खिसकने की वजह से जबड़े के निचले और ऊपरी भाग आपस में जुड़ नहीं पा रहे थे। वे खाना चबाने में असमर्थ थे। बार-बार बाइट अल्सर भी रहने लगा था, जो दर्द के अलावा कैंसर की फिर से आशंका को बढ़ा रहा था। 

गुरुग्राम की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले प्रभजीत के बारे में डॉ. मंदीप एस मलहोत्रा ने बताया कि एसएलई रोग और जबड़े को नया रूप देने के लिए वे पारंपरिक प्रक्रिया नहीं अपनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने 3डी तकनीक की मदद लेते हुए पहले चेहरे के आकार का एक मॉडल तैयार किया और उसके बाद ऑपरेशन किया। टिटेनियम से निर्मित प्रोस्थेटिक जॉ को तैयार किया, जो कि सर्वाधिक बायोकॉम्पेटिबल और लाइट मैटल है। नए जबड़े के साथ ही अब प्रभजीत का आत्मविश्वास भी लौट आया है। 
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डॉ. मलहोत्रा ने बताया कि उनकी टीम के सदस्य प्रभात और डॉ. नेहा ने सही एलाइनमेंट हासिल करने के लिए भरपूर प्रयास जारी रखे। हमारी कोशिश थी कि नया जबड़ा सामान्य से भी बेहतर हो। मेडिकल जर्नल्स का अध्ययन करने के बाद ये पाया है कि यह अपनी तरह की पहली प्रक्रिया है। अब प्रभजीत पहले की तरह खानपान कर सकते हैं।  

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