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यूपीएससी परीक्षा में आयु सीमा 32 से 26 साल करने की सिफारिश

Tue, 30 Aug 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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परीक्षा - फोटो : demo pic
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सिविल सेवा की परीक्षा में उम्र पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) बदलाव कर सकता है। क्योंकि यूपीएससी द्वारा गठित बीएस बासवान कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में परीक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा कम करने का सुझाव दिया है। 
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बासवान कमेटी का सुझाव है कि सामान्य वर्ग में 32 की बजाय आयु सीमा को 26 साल तक किया जाए। इस रिपोर्ट में छात्रों से ऑनलाइन उम्र, भाषा, परीक्षा व वैकल्पिक विषय पर मांगे सुझाव को भी शामिल किया है।

हालांकि आयोग समेत सरकार ने इस मामले पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2015 में यूपीएससी ने परीक्षा संबंधी नियमों के लिए बीएस बासवान कमेटी का गठन किया था।
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बासवान कमेटी ने करीब एक साल तक विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों समेत छात्रों से ऑनलाइन समेत मिलकर सुझाव भी लिए थे। कमेटी का मानना है कि सामान्य वर्ग के  छात्रों की अधिकतम आयु सीमा में कमी की जाए। इसके तहत 26 साल से ज्यादा आयु वाले सामान्य वर्ग के छात्र परीक्षा नहीं दे सकेंगे।

सूत्रों का कहना है कि न्यूनतम आयु के नियम में बदलाव को कोई सिफारिश नहीं है। वहीं, एससी, एसटी के छात्रों के लिए आयु से जुड़े नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। इन वर्ग के लिए अधिकतम उम्र 37 है और यही रहेगी।

सूत्रों के मुताबिक, कमेटी का मानना है कि आईएएस, आईएफएस, आईपीएस में ज्यादा युवा अधिकारी आने चाहिए। फिलहाल कई लोग सालों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं और अक्सर 32 की उम्र में सफल हो पाते हैं। बाद में इनकी ट्रेनिंग होती है। 

कमेटी ने उम्र कम करने पर मांगे थे सुझाव
'सीसेट मामले पर बासवान कमेटी से सीसेट प्रभावित परीक्षार्थियों की दो बार मुलाकात हुई थी। हालांकि सीसेट के मामले पर तो उन्होंने कोई सिफारिश न करने की बात कही थी, लेकिन कमेटी ने कहा था कि सामान्य वर्ग की अधिकतम आयु सीमा कम होनी चाहिए। हालांकि यह एक साथ नहीं, बल्कि 32 से 30,30-28, 28-26 करने की भी बात हुई है।'  -शिवांगी, परीक्षार्थी, यूपीएससी। 

उम्र कम होने से अच्छे और बुरे प्रभाव होंगे
'बासवान कमेटी ने अगस्त में यूपीएससी को बेशक रिपोर्ट सौंप दी है लेकिन फिलहाल आयोग और सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। लेकिन उम्र
कम करने पर सभी दलों से सहमति देने की मांग जरूर उठ रही है। उम्र कम होने से मेडिकल समेत अन्य प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई करने वाले
सामान्य वर्ग के छात्रों के पास समय कम होगा। इसके अलावा सामान्य वर्ग को छह की बजाय चार मौके ही मिल पाएंगे।' - डॉ. एसएस पांडे, दीक्षांत अकेडमी, दिल्ली। 
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