फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच सालों में बदली कटऑफ की तस्वीर, कुछ यूं हुई बढ़ोतरी

Sat, 09 Jul 2016 01:53 PM IST
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
डीयू दाखिला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले की अहम कड़ी यानि कटऑफ लिस्ट में पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खासकर बीते पांच सालों में तो कटऑफ लिस्ट की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। कभी 85 फीसदी के आसपास रहने वाली कट ऑफ 99 फीसदी का आंकड़ा भी पार कर गई है।
विज्ञापन


बीते सालों में तो कंप्यूटर साइंस व इतिहास ऑनर्स के लिए भी कटऑफ ने सौ फीसदी का आंकड़ा छू लिया है।  पहले जहां साइंस पाठ्यक्रमों की कटऑफ ज्यादा ऊंची जाती थी, वहीं अब कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम के पाठ्यक्रमों ने कटऑफ में बढ़ोतरी के मामले में साइंस को पछाड़ दिया है। 

अगर आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 2011 से अब तक कटऑफ स्तर में करीब 5-7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली विश्वविद्यालय में इस साल पहली कटऑफ में रामजस कॉलेज ने बीकॉम के लिए सबसे अधिक 99.25 फीसदी कटऑफ जारी की है। 
विज्ञापन


विशेषज्ञ डीयू में कटऑफ का ग्राफ बढ़ने के कई कारण बताते हैं। डिप्टी डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ गुरप्रीत सिंह टुटेजा कहते हैं कि 2011 से पहले तक डीयू में केवल ऑफलाइन आवेदन ही होता था ऐसे में बाहरी राज्यों के छात्र यहां आकर उस तरीके से दाखिला नहीं लेते थे जैसे अब लेते हैं। जैसे ही ऑनलाइन आवेदन होने लगा है वैसे ही डीयू ने हर छात्र तक अपनी पहुंच बना दी है। वहीं विभिन्न बोर्ड में एक दूसरे को टक्कर देने के लिए नंबर देने की होड़ बढ़ गई है।
विज्ञापन

कुछ खास कॉलेजों का लगातार बढ़ रहा है क्रेज

डीयू दाखिला - फोटो : अमर उजाला
सीबीएसई के अलावा अन्य राज्य बोर्ड में भी छात्रों के रिजल्ट 85 फीसदी से ऊपर ही आने लगा है। दिल्ली के आसपास के राज्यों के ज्यादातर विश्वविद्यालयों कटऑफ की बजाए प्रवेश परीक्षा से दाखिले होते हैं। ऐसे में ज्यादा छात्रों के डीयू में आवेदन करने से कटऑफ बढ़ जाती है। 

वहीं डीयू की रैकिंग अच्छी होने के साथ-साथ कुछ खास कॉलेजों का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। वहीं दिल्ली अब उच्च शिक्षा का हब बन गई है। डीयू के साउथ, नॉर्थ कैंपस के आसपास के इलाकों में आईएएस, इंजीनियरिंग, व मेडिकल की कोचिंग आसानी से उपलब्ध है।
    कट ऑफ की वर्ष 2011 से पहले की स्थिति वर्ष 2000 तक डीयू के लगभग सभी कॉलेजों में साइंस की कट ऑफ लिस्ट का स्तर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलती थी। लेकिन वर्ष 2011 तक स्थिति काफी हद तक बदल गई। 2011 तक आते-आते ऊंची कट ऑफ के मामले में साइंस का स्थान कॉमर्स ने ले लिया। वहीं दो-तीन सालों बाद ही आर्ट्स के पाठ्यक्रम में भी चुपचाप कटऑफ लिस्ट की दौड़ में शामिल होते गए। 

यही कारण रहा है कि डीयू के टॉप कॉलेजों ही नहीं, बल्कि आम कॉलेजों में भी बीकॉम ऑनर्स और बीए इकॉनॉमिक्स ऑनर्स और बीए इंग्लिश ऑनर्स जैसे कोर्सेज में कटऑफ लिस्ट के स्तर ने 90 फीसदी का आंकड़ा छू लिया। मौजूदा समय में यह स्तर 95 फीसदी के पार पहुंचने लगा है। जबकि साइंस पाठ्यक्रम इस दौड़ में अब काफी पीछे रह गए हैं। वर्ष 2012-13 में तो पहली कट ऑफ में इतिहास की कट ऑफ 100 फीसदी रही। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें