द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी एवं संस्कृत का विकल्प देना चाहिए। जबकि तीसरी भाषा के रूप में आठवीं अनुसूची की अन्य भाषाओं एवं अंग्रेजी का विकल्प दिया जा सकता है।
आरएसएस विचारक व शिक्षाविद दीनानाथ बत्रा ने यह सिफारिश किरोड़ीमल कॉलेज में नई शिक्षा नीति पर आयोजित एक सेमिनार में की।
उनका मानना है कि स्थाई शिक्षा आयोग की जगह उसका नाम सलाहकार समिति कर देना सही है। इस समिति में उन्होंने अधिकतर शिक्षा जगत से जुड़े लोगों को शामिल करने की वकालत की।