देश के स्कूली छात्रों में नैतिक मूल्यों के साथ अनुशासन में गिरावट आ रही है। निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों के छात्र सक्रिय रूप से पढ़ाई से भी नहीं जुड़ रहे हैं। यह खुलासा वायस ऑफ टीचर-2016 के सर्वे में हुआ।
सर्वे में देशभर के सरकारी व निजी स्कूल के शिक्षकों को शामिल किया गया। पीयर्सन के प्रबंध निदेशक दीपक मेहरोत्रा के मुताबिक, 15 राज्यों में किए गए सर्वे का मुख्य मकसद शिक्षा में गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षकों की राय जानने के साथ-साथ छात्रों से जुड़े तथ्यों को भी सामने लाना था।
चूंकि छात्र सबसे अधिक समय शिक्षक के साथ होता है। ऐसे में शिक्षकों को उससे जुड़ी जानकारियों को साझा करना था, ताकि समस्याओं के सुधार पर काम हो सके।
सर्वे में 59 फीसदी शिक्षकों का कहना था कि पिछले पांच सालों में पढ़ाई से जुड़ने में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि कॉलेज स्तर पर अभी भी यह आंकड़ा बेहद कम है।
सर्वे में खास बिंदु
करीब 73 फीसदी शिक्षकों ने माना कि पांच सालों में पढ़ने की गतिविधियों में छात्रों की संख्या बढ़ी है। लगभग 42 प्रतिशत शिक्षकों ने नैतिक मूल्यों व 38 फीसदी ने छात्रों में अनुशासन में गिरावट का जिक्र किया।
करीब 29 फीसदी ने माना अभिभावक बच्चों को गैजेट प्रयोग करने की अनुमति नहीं देते हैं। उधर, 27 फीसदी ने बच्चों में गैजेट का अत्यधिक प्रयोग करने की शिकायत की। तकरीबन 24 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि अभिभावक बच्चों को पढ़ाई में सहयोग नहीं करते।