सुशांत लोक फेज-1 स्थित शैलोम हिल्स इंटरनेशनल स्कूल द्वारा बढ़ी फीस नहीं देने पर स्कूल से तीन बच्चों को बाहर निकालने का मामला फिर सामने आया है। सोमवार को बच्चों को स्कूल से बाहर कर दिया गया। अब इस मामले में बच्चों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से इस मामले में हस्तक्षेप इंसाफ दिलाने की मांग की है।
इस मामले में पहले भी अतिरिक्त जिला उपायुक्त कार्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत की गई थी, जिसके बाद इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने फी एंड फंड कमेटी का हवाला देते हुए बढ़ी फीस के मामले का स्थाई समाधान नहीं होने तक बच्चों के साथ बेहतर सलूक करने का आदेश दिया था।
दो अभिभावकों का आरोप है कि इस बारे में स्कूल प्रबंधन से बात की गई तो उन्होंने पहले फीस जमा कराने को कहा। अभिभावकों का जब स्कूल से फॉर्म.6 के अनुसार पूरी फीस जमा कराई हुई है तो वे अवैध रूप से बढ़ी हुई फीस को जमा नहीं कराएंगे। अभिभावक रामफल ने बताया कि उनके बच्चे शैलोम हिल्स इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई करते हैं। पिछले वर्ष से स्कूल फीस को लेकर उनके व स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद चल रहा है।
फी एंड फंड कमेटी के चेयरमैन डी सुरेश के पास जब यह मामला पहुंचा था तो उन्होंने फीस को लेकर स्टे दे दिया था। इस मामले में एक याचिका कोर्ट में भी दायर है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कमेटी के चेयरमैन व कोर्ट ने स्कूल प्रबंधन को बच्चों को फीस को लेकर परेशान न करने के आदेश दिए थे। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
अभिभावक का आरोप है कि मार्च में जब स्कूल प्रबंधन ने रिजल्ट जारी किया तब से रिजल्ट देने व बच्चों को दूसरे कक्षा में पदोन्नत करने को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से परेशान किया जा रहा है। सोमवार को जब बच्चे स्कूल गए तो स्कूल प्रबंधन ने स्कूल के अंदर ही प्रवेश नहीं करने दिया।
बच्चे सुबह 08.00 बजे से दोपहर 02.00 बजे तक बाहर बैठे रहे, लेकिन कोई भी इस बारे में संज्ञान नहीं लिया। रामफल का कहना है कि केवल उन्हीं के दोनों बच्चों के साथ नहीं बल्कि अन्य बच्चे के साथ भी ऐसा बर्ताव किया गया है। इसमें इशिता, ग्रहिश व स्निग्दा का नाम शामिल है।
इन बच्चों के अभिभावकों का आरोप यह भी है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा दबाव बनाया जा रहा है कि वे उन्हें जब तक यह लिखित में नहीं देंगे कि वे स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे और जो कार्रवाई की गई है उसे वापस ले लेंगे। तब तक बच्चों को स्कूल में एडमिशन नहीं दिया जाएगा।
नीलम भंडारी, जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ऐसा बर्ताव करना गलत है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पहले ही आदेश जारी कर दिए गए हैं। फीस का मामला बाद में देखा जाएगा, पहली प्राथमिकता बच्चों का भविष्य है। फीस को लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव के सामने मुद्दा रखा जाएगा, जो भी निर्णय होगा। वह स्कूल को स्वीकार करना होगा।