जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष मोहित कुमार पांडे ने एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम में सीट कटौती पर एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावडेकर को पत्र लिखा है।
छात्रसंघ अध्यक्ष ने पूछा है कि महज नेशनल रैंकिंग 2017 में जेएनयू को दूसरा रैंक उसकी रिसर्च के चलते मिला है, हालांकि अब जब सीट कटौती हो रही है तो उसका असर रिसर्च पर भी पड़ेगा।
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित के मुताबिक, हमने जावडेकर को ईमेल से भेजे पत्र में लिखा है कि केंद्रीय मंत्री होने के नाते आप देशभर में उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता देने और उच्च रैंकिंग वाले संस्थानों को अधिक फंड मुहैया करवाने की बात कह रहे हैं।
हालांकि यूजीसी नोटिफिकेशन 2016 के चलते जेएनयू की स्वायत्तता खतरे में है। महिलाओं और पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए डेप्रीवेशन प्वाइंट नहीं मिल रहे हैं। वहीं, अब यूजीसी ने स्कॉलरशिप आदि की फंड भी रोक ली है।
पत्र में लिखा है कि आप बार-बार भारतीय विश्वविद्यालयों की विदेशी विश्वविद्यालयों से तुलना कर रहे हैं हालांकि छात्र-शिक्षक की संख्या का अनुपात सही न होने के चलते हम विदेशी विश्वविद्यालयों की टक्कर में खड़े ही नहीं हो पा रहे हैं।
देशभर के सभी विश्वविद्यालयों की तरह जेएनयू में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, लेकिन कुलपति व यूजीसी समेत मंत्रालय इन पदों पर शिक्षकों की भरती का विज्ञापन जारी करने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो रहा है जबकि पहले शिक्षकों के खाली पदों को भरना चाहिए था, उसके बाद यूजीसी नोटिफिकेशन 2016 के तहत एमफिल व पीएचडी दाखिले के नियम बनाने चाहिए थे।
इस नियम के चलते दूर-दराज व पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले छात्रों खासकर लड़कियों को उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने में दिक्कत होगी, क्योंकि जेएनयू में फीस कम होने के कारण वे आसानी से दाखिला ले पाते थे।